'अपने सैनिकों की सलामती चाहिए तो…', ट्रंप की धमकी पर खामेनेई के करीबी का पलटवार

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर खामेनेई सरकार को एक कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ईरानी शासन ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया, तो अमेरिका इस स्थिति में हस्तक्षेप करने के लिए तैयार है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान में नागरिकों का एक बड़ा हिस्सा सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आया है। प्रदर्शनकारी आर्थिक संकट, राजनीतिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।

ईरान में चल रहे ये विरोध प्रदर्शन पिछले कुछ महीनों से बढ़ते जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने सरकार की नीतियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज उठाई है। ऐसे में ट्रंप का बयान एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। उन्होंने कहा, “हम ईरान के लोगों के साथ खड़े हैं। अगर ईरानी सरकार ने अपने ही नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग किया, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा।”

इस बयान के बाद, ईरान सरकार ने भी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि उनके देश की आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना उनकी सरकार की प्राथमिकता है। इस तरह की बयानबाजी ने स्थिति को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है।

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच यह तनाव केवल राजनीतिक नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक भू-राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा भी है। अमेरिका का ईरान पर दबाव बनाना और ईरान का अपनी संप्रभुता की रक्षा करना, इन दोनों के बीच चल रही असहमति को और बढ़ा सकता है।

ईरान के विरोध प्रदर्शनों के प्रति अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें भी टिकी हुई हैं। कई देशों ने प्रदर्शनकारियों के प्रति समर्थन व्यक्त किया है, जबकि कुछ ने ईरान सरकार की कार्रवाई की निंदा की है। इस समय, ईरान की स्थिति पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यह न केवल देश के अंदर, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रभाव डाल सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका की भूमिका और ईरान के निर्णय, दोनों ही भविष्य में अंतरराष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे क्या घटनाएँ घटित होती हैं और दोनों पक्ष किस दिशा में बढ़ते हैं।

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