सऊदी से ज्यादा तेल फिर भी दाने-दाने को मोहताज वेनेजुएला:कभी दुनिया का चौथा अमीर देश था, शॉपिंग के लिए लोग मियामी जाते थे

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# वेनेजुएला: तेल से भरे देश की आर्थिक तबाही की कहानी

मुख्य बिंदु

# वेनेजुएला: तेल से भरे देश की आर्थिक तबाही की कहानी

वेनेजुएला की कहानी एक ऐसे देश की है, जिसके पास सऊदी अरब से भी अधिक तेल है, लेकिन पिछले एक दशक में उसने अपनी 80% जीडीपी खो दी है। कभी दुनिया के सबसे अमीर देशों में से एक, वेनेजुएला ने अपनी दौलत का ऐसा गलत प्रबंधन किया कि आज वहां के लोग देश छोड़ने पर मजबूर हैं। हाल ही में, अमेरिका ने 3 जनवरी को वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई की और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया। इस घटना का असर भारत में आम लोगों पर भी पड़ सकता है।

विस्तृत जानकारी

## वेनेजुएला का सुनहरा अतीत

### 1950 के दशक का विकास

1950 के दशक में, जब दुनिया दूसरे विश्व युद्ध के नुकसान से उबर रही थी, तब वेनेजुएला की किस्मत तेल के कारण बदल गई। 1952 में, वेनेजुएला दुनिया का चौथा सबसे अमीर देश बन गया था। उस समय काराकस की सड़कों पर लग्जरी कारें दौड़ती थीं और ऊंची इमारतें खड़ी थीं। 1960 के दशक में, वेनेजुएला ने सऊदी अरब और ईरान जैसे देशों के साथ मिलकर ‘ओपेक’ का गठन किया।

यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है

### तेल संकट और आर्थिक उन्नति

1970 के दशक में, जब पूरी दुनिया में तेल संकट आया, वेनेजुएला के घरों में डॉलर की बारिश होने लगी। इस दौरान, देश ने अपने तेल संसाधनों का भरपूर उपयोग किया और अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत किया।

## हाल के वर्षों में आर्थिक पतन

### महंगाई और जीवन स्तर का गिरना

लेकिन पिछले एक दशक में, इस देश की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा पतन हुआ। 2018 तक, यहां की महंगाई 1,30,000% के पार चली गई। लोगों को एक दर्जन अंडे खरीदने के लिए भी नोटों से भरा झोला ले जाना पड़ता था। 1990 के दशक के अंत में, जब वेनेजुएला रोजाना 35 लाख बैरल तेल निकालता था, आज वह संख्या घटकर 8 से 11 लाख बैरल पर आ गई है।

## अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और उसके प्रभाव

### राष्ट्रपति मादुरो की गिरफ्तारी

अमेरिका के सैन्य ऑपरेशन के बाद, ट्रम्प सरकार का दावा है कि अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला में अरबों डॉलर का निवेश करेंगी, जिससे वहां का टूट चुका इंफ्रास्ट्रक्चर ठीक होगा। यदि वहां एक स्थिर व्यवस्था बनती है, तो अमेरिका के द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध हट सकते हैं, जिससे वेनेजुएला का तेल फिर से वैश्विक बाजार में आ सकता है।

### भारत पर संभावित प्रभाव

इससे न केवल वहां की अर्थव्यवस्था सुधरेगी, बल्कि भारत जैसे देशों को भी सस्ता कच्चा तेल मिल सकेगा। वेनेजुएला भारत से करीब 15 हजार किमी दूर है, लेकिन वहां की सत्ता में बदलाव भारत के लिए फायदेमंद हो सकता है। भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, और वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है।

## रिलायंस और ONGC की संभावनाएं

### निवेश की उम्मीदें

अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत वहां से तेल नहीं खरीद पा रहा था। रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास ऐसी रिफाइनरी है जो वेनेजुएला के ‘भारी और गाढ़े’ तेल को साफ करने के लिए जानी जाती है। अब, रिलायंस और सरकारी कंपनी ONGC, जो वेनेजुएला के तेल कुओं में करोड़ों का निवेश कर चुकी है, का अटका हुआ पैसा और बिजनेस फिर से शुरू होने की उम्मीद है।

## निकोलस मादुरो का उदय और पतन

### एक बस ड्राइवर से राष्ट्रपति तक

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी सैनिकों ने राजधानी कराकस से उठाया है। उन पर अमेरिका में मुकदमा चलाया जाएगा। जानिए मादुरो कैसे एक मामूली बस ड्राइवर से वेनेजुएला के ‘अजेय राष्ट्रपति’ बने और अमेरिका के दुश्मन कैसे बने।

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वेनेजुएला की कहानी एक महत्वपूर्ण उदाहरण है कि कैसे प्राकृतिक संसाधनों का गलत प्रबंधन देश को आर्थिक संकट में डाल सकता है। वर्तमान में, अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और संभावित निवेश से वेनेजुएला की आर्थिक स्थिति में सुधार की उम्मीद है, जो भारत जैसे देशों के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। इस घटनाक्रम पर नज़र रखना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि इसका प्रभाव वैश्विक बाजारों और अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।

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