वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे का निधन:अमेरिका में स्कीइंग के दौरान घायल हुए थे अग्निवेश; कार्डियक अरेस्ट के बाद ली अंतिम सांस

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# अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश का निधन: एक परिवार की दुखद कहानी

मुख्य बिंदु

# अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश का निधन: एक परिवार की दुखद कहानी

## अग्निवेश का आकस्मिक निधन

विस्तृत जानकारी

वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश का निधन हो गया है। उनकी उम्र केवल 49 वर्ष थी। अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि अग्निवेश अमेरिका में स्कीइंग के दौरान घायल हुए थे। उन्हें इलाज के लिए माउंट साइनाई अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्हें बुधवार को कार्डियक अरेस्ट आया। अनिल अग्रवाल ने बुधवार रात करीब 10 बजे X पर पोस्ट कर बेटे के निधन की जानकारी दी। एक भावुक पोस्ट में उन्होंने इसे अपने जीवन का सबसे अंधकारमय दिन बताया।

## अनिल अग्रवाल का वादा

अनिल अग्रवाल ने अपने बेटे के प्रति किए गए वादे को निभाते हुए अपनी कमाई का 75% समाज को लौटाने का निर्णय लिया है। यह निर्णय उनके बेटे की याद में लिया गया है और यह दर्शाता है कि अग्निवेश ने समाज सेवा को कितनी महत्वता दी थी।

यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है

## अग्निवेश का जीवन और करियर

अनिल अग्रवाल ने अपने बेटे के साथ कुछ तस्वीरें भी साझा की हैं। उन्होंने बताया कि अग्निवेश का जन्म 3 जून 1976 को पटना में हुआ था। उन्होंने अजमेर के मेयो कॉलेज से पढ़ाई की और एक सफल पेशेवर करियर बनाया। अग्निवेश ने फुजैराह गोल्ड की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और हिंदुस्तान जिंक के चेयरमैन भी रहे। अनिल अग्रवाल ने अपने बेटे को एक खिलाड़ी, संगीतकार और लीडर बताया, जो अपनी गर्मजोशी, विनम्रता और दयालुता के लिए जाने जाते थे।

## अनिल अग्रवाल का संघर्ष और सफलता

अनिल अग्रवाल, जिन्हें मेटल किंग के नाम से जाना जाता है, का जन्म भी पटना में हुआ था। उनके परिवार की जड़ें राजस्थान में हैं, लेकिन उनके पिता कारोबार के सिलसिले में बिहार चले गए थे। अनिल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पटना में प्राप्त की और बाद में जयपुर के चौमूं और सीकर में भी पढ़ाई की।

अनिल अग्रवाल का जन्म 1954 में पटना के एक मारवाड़ी परिवार में हुआ। उनके पिता द्वारका प्रसाद अग्रवाल एक छोटे से एल्यूमीनियम कंडक्टर के कारोबारी थे। अनिल ने अपने पिता के बिजनेस में हाथ बंटाया और 19 वर्ष की उम्र में बेहतर भविष्य की तलाश में मुंबई पहुंचे। वहां उन्होंने कई छोटे धंधों में हाथ आजमाया, लेकिन सभी असफल रहे। फिर उन्होंने वेदांता की स्थापना की। हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था, ‘मैंने सोचा नहीं था कि साधारण आदमी होते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान दूंगा।’

## वेदांता: एक उद्योग का विकास

वेदांता, जो जिंक, लेड, एल्युमिनियम और सिल्वर बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है, के फाउंडर अनिल अग्रवाल को भारत के मेटल मैन के नाम से जाना जाता है। अनिल अग्रवाल ने अपने शुरुआती करियर में कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। 1976 में उन्होंने शमशेर स्टर्लिंग केबल कंपनी खरीदी, जिसके बाद उन्होंने वेदांता रिसोर्सेज की स्थापना की।

## अनिल अग्रवाल की दूरदर्शिता

2001 में, भारत सरकार ने प्राइवेट कंपनियों को सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी का ऑफर दिया, और वेदांता ने भारत एल्युमिनियम कंपनी में 51% शेयर खरीद लिया। इस सौदे ने अनिल अग्रवाल को भारत का ‘मेटल किंग’ बना दिया। उनकी कंपनी ने बाद में हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड में भी हिस्सेदारी खरीदी, जिससे वेदांता ने माइनिंग सेक्टर में एक मजबूत स्थिति बनाई।

## प्रेरणादायक यात्रा

अनिल अग्रवाल की यात्रा प्रेरणादायक रही है। उन्होंने अपने संघर्षों को पार करते हुए उद्योग में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया और भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई। उनका यह सफर न केवल व्यक्तिगत सफलता का प्रतीक है, बल्कि यह यह भी दर्शाता है कि कठिनाइयों के बावजूद, अगर इरादा मजबूत हो, तो किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

अग्निवेश का निधन उनके परिवार और उद्योग के लिए एक बड़ा नुकसान है, लेकिन अनिल अग्रवाल का संकल्प और उनकी प्रेरणादायक यात्रा आगे भी कई लोगों को प्रेरित करती रहेगी।

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