चीन का ट्रेड सरप्लस पहली बार $1.19 ट्रिलियन के पार:2024 के एक्सपोर्ट के मुकाबले ये 20% बढ़ा; ट्रंप का टैरिफ भी बेअसर रहा

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# चीन का नया रिकॉर्ड: ट्रेड सरप्लस 1.19 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा

मुख्य बिंदु

# चीन का नया रिकॉर्ड: ट्रेड सरप्लस 1.19 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा

## चीन की अर्थव्यवस्था में नया मील का पत्थर

विस्तृत जानकारी

चीन, जो कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, ने अपने ट्रेड सरप्लस को एक नया रिकॉर्ड बनाते हुए 1.19 ट्रिलियन डॉलर (लगभग ₹100 लाख करोड़) तक पहुंचा दिया है। यह आंकड़ा 2024 की तुलना में 20% अधिक है, और महंगाई को ध्यान में रखते हुए, यह किसी भी देश द्वारा अब तक दर्ज किया गया सबसे बड़ा ट्रेड सरप्लस है। चीन के जनरल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ कस्टम्स के अनुसार, दिसंबर महीने में अकेले चीन ने 114.14 बिलियन डॉलर (करीब 10.31 लाख करोड़ रुपए) का सरप्लस कमाया, जो कि चीन के इतिहास का तीसरा सबसे सफल महीना है।

## ट्रेड सरप्लस का महत्व

ट्रेड सरप्लस का मतलब होता है कि किसी देश का निर्यात उसके आयात से अधिक है। यह आर्थिक स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण संकेत है। अमेरिका में चीनी सामान की बिक्री पर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए 30% टैरिफ का असर जरूर पड़ा, लेकिन चीनी कंपनियों ने अपने उत्पादों को दक्षिण-पूर्व एशिया और अन्य क्षेत्रों के जरिए अमेरिका में भेजने के नए रास्ते खोज लिए हैं। इसके साथ ही, चीन की सरकार ने ‘आत्मनिर्भरता’ की नीति को अपनाया है, जिसका उद्देश्य घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है।

यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है

## आत्मनिर्भरता की नीति

अक्टूबर में घोषित पांच साल के आर्थिक प्लान में भी आत्मनिर्भरता पर जोर दिया गया है। यह नीति घरेलू उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए बनाई गई है, ताकि चीन अपनी अर्थव्यवस्था को और मजबूत कर सके। चीन ने 1993 के बाद से कभी भी ट्रेड डेफिसिट का सामना नहीं किया है, जो कि इस बात का प्रमाण है कि उसकी अर्थव्यवस्था स्थिर है।

## करेंसी की स्थिति और विदेशी खरीदारी

वर्तमान में चीन की करेंसी ‘रेनमिनबी’ कमजोर है, जिससे विदेशी खरीदारों के लिए चीनी सामान सस्ता हो गया है, जबकि चीन के लिए आयात महंगा पड़ रहा है। इसके अलावा, चीन के रियल एस्टेट मार्केट में गिरावट के कारण आम परिवारों की बचत पर असर पड़ा है, जिससे लोग विदेशी सामान खरीदने में असमर्थ हो रहे हैं।

## IMF की चेतावनी

इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने हाल ही में बीजिंग में चेतावनी दी थी कि चीन अब अपने निर्यात पर निर्भर नहीं रह सकता। उन्होंने सलाह दी कि चीन को अपनी करेंसी को मजबूत करने और घरेलू खपत को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। ऐसा न करने पर वैश्विक व्यापार युद्ध की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

## चीन का सरप्लस अन्य देशों के मुकाबले

चीन का 1.19 ट्रिलियन डॉलर का सरप्लस दर्शाता है कि उसने अन्य देशों से लगभग ₹100 लाख करोड़ अधिक कमाए हैं। यह आंकड़ा जापान और जर्मनी के मुकाबले भी कहीं अधिक है। 1993 में जापान का सरप्लस आज के हिसाब से $214 बिलियन था, जबकि 2017 में जर्मनी का रिकॉर्ड $364 बिलियन रहा। वर्तमान में, चीन इन दोनों देशों से 3 से 5 गुना आगे निकल चुका है।

## महंगाई की स्थिति

इसके अलावा, दिसंबर में थोक महंगाई (WPI) 0.83% पर पहुंच गई है, जो पिछले 8 महीनों में सबसे अधिक है। खाने-पीने की चीजों की महंगाई के चलते यह वृद्धि हुई है। इससे पहले, नवंबर में थोक महंगाई -0.32% पर थी।

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चीन का 1.19 ट्रिलियन डॉलर का ट्रेड सरप्लस उसके आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण संकेत है। हालांकि, घरेलू खपत और करेंसी की मजबूती पर ध्यान देने की आवश्यकता है। चीन की सरकार को अपनी नीति में संतुलन बनाने की आवश्यकता है, ताकि वह वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति को और मजबूत कर सके।

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