करियर सिर्फ डिग्री से नहीं, स्किल से बनेगा:जोहो के फाउंडर श्रीधर वेम्बू कहते हैं- AI को अपनाएं, पर इसके गुलाम न बनें

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# ‘मेड इन इंडिया’ टेक: एक आवश्यकता और अवसर

मुख्य बिंदु

# ‘मेड इन इंडिया’ टेक: एक आवश्यकता और अवसर

## भारतीय तकनीक में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

विस्तृत जानकारी

‘मेड इन इंडिया’ टेक अब केवल एक चर्चा का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह एक आवश्यक आवश्यकता बन चुका है। भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालय विदेशी कंपनियों जैसे गूगल और माइक्रोसॉफ्ट को छोड़कर स्वदेशी प्लेटफॉर्म जोहो को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या भारत एआई और उन्नत तकनीक में आत्मनिर्भर बन पाएगा। जोहो के फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने इस विषय पर अपनी स्पष्ट राय दी है।

## एआई में निवेश और भारतीय तकनीकी योजना

श्रीधर वेम्बू ने बताया कि गूगल ने एआई में 15 वर्षों तक निरंतर निवेश किया है, जिसके फलस्वरूप कई शोध और प्रयोग हुए हैं। उन्होंने यह आवश्यक बताया कि भारत को भी एआई के क्षेत्र में एक 10 साल का ‘टेक रेजिलिएंस’ प्लान बनाना होगा। यह योजना न केवल तकनीकी विकास को बढ़ावा देगी, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम होगी।

यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है

### सरकारी मंत्रालयों का जोहो की ओर झुकाव

जोहो की ओर सरकारी मंत्रालयों का झुकाव एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। लेकिन वेम्बू का कहना है कि अभी भी हमें तकनीक पर अपनी निर्भरता को कम करने के लिए काफी मेहनत करनी है। उदाहरण के लिए, एआई के लिए भारत को एनवीडिया की जीपीयू चिप्स की आवश्यकता होती है, लेकिन देश को साल भर में केवल 50,000 चिप्स का कोटा मिलता है। यह स्थिति भारत को इन तकनीकों को स्वदेशी रूप से विकसित करने की जरूरत को उजागर करती है।

## तकनीकी विकास की दिशा में रणनीति

श्रीधर वेम्बू ने कहा कि हमें केवल एआई पर ध्यान केंद्रित नहीं करना चाहिए। देश को 100-200 महत्वपूर्ण तकनीकों की पहचान करनी होगी, जिनमें धातुकर्म से लेकर सेमीकंडक्टर्स तक शामिल हैं। उन्होंने उदाहरण के तौर पर कोरिया का उल्लेख किया, जहां छोटी-छोटी उत्पादों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। यदि भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करनी है, तो हमें एक दीर्घकालिक नीति बनानी होगी।

### शिक्षा और कौशल विकास पर जोर

शिक्षा के क्षेत्र में, श्रीधर वेम्बू ने स्किल्स पर जोर दिया और कहा कि छात्रों को अपनी डिग्री के साथ-साथ नई-नई स्किल्स सीखनी चाहिए। यह आवश्यक है कि छात्रों को प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अवसर मिले। उन्होंने यह भी बताया कि एआई से नौकरियों की प्रकृति में बदलाव आएगा, लेकिन यह उन नौकरियों को नहीं लेगा जिनमें मानव जुड़ाव जरूरी है, जैसे कि शिक्षक और डॉक्टर।

## भारतीय कंपनियों के लिए रैंकिंग प्रणाली

भारतीय कंपनियों को प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए एक रैंकिंग प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता है, जैसे कि नीट-जेईई की रैंकिंग। इससे कंपनियों को पहचान मिलेगी और निवेश के अवसर बढ़ेंगे। श्रीधर वेम्बू ने यह भी कहा कि भारत की युवा आबादी को सुरक्षित करने के लिए इनोवेशन की आवश्यकता है।

### ग्रामीण क्षेत्रों में छिपा टैलेंट

श्रीधर वेम्बू ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी टैलेंट मौजूद है, और हमें इसे पहचानने की आवश्यकता है। भारत में 832 जिले हैं, जिनमें से 600 ग्रामीण माने जाते हैं। यदि हम हर जिले के लिए एक टेक्नोलॉजिस्ट की नियुक्ति कर सकें, तो यह संभव है।

## व्यक्तिगत अनुभव और जीवन का मंत्र

उन्होंने गांव से जुड़ी एक याद साझा की, जिसमें एक बुजुर्ग महिला ने उनसे कहा था कि वे गांव को न भूलें और वहां के लोगों के लिए कुछ करें। श्रीधर वेम्बू का मानना है कि खुशी का मंत्र इस पल में जीने में है। छोटी-छोटी चीजों में आनंद लेना ही असली खुशी है।

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‘मेड इन इंडिया’ टेक की दिशा में उठाए गए कदम न केवल भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देंगे, बल्कि देश को वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धी बनाएंगे। श्रीधर वेम्बू के विचारों पर ध्यान देकर, भारतीय कंपनियों और युवा पीढ़ी को इस दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।

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