सरकार ने मंगलवार को नेशनल हाईवेज पर टोल नियम सख्त कर दिए हैं। अब टोल न चुकाने वाले वाहनों को NOC, फिटनेस सर्टिफिकेट और नेशनल परमिट जैसी सेवाएं नहीं मिलेंगी। यह बदलाव सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स 2026 के तहत किए गए हैं। इसका मकसद इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन मजबूत करना और टोल चोरी रोकना है। कई बार नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा पर गाड़ी का फास्टैग स्कैन होने पर टेक्नीकल खामी की वजह से टोल नहीं कट पाता। फास्टैग में बैलेंस कम होने पर भी गाड़ियां टोल क्रॉस कर जाती हैं। अब ऐसे वाहनों की बकाया राशि गाड़ी के रिकॉर्ड से जुड़ जाएगी। कौन-कौन सी सेवाएं रोकी जाएंगी? नए नियमों के लागू होने के बाद, अगर किसी गाड़ी पर टोल का बकाया मिलता है, तो उसकी ये सर्विसेज रोकी जाएंगी। कैसे काम करेगा यह सिस्टम? गाड़ी के रिकॉर्ड से टोल बकाया जुड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल और ऑटोमेटेड होगी। इसे 3 स्टेप्स में समझा जा सकता है: 1. टोल प्लाजा पर लगा सेंसर और कैमरा: जैसे ही आपकी गाड़ी किसी टोल प्लाजा से गुजरती है, वहां लगा आरएफआईडी (RFID) रीडर आपके फास्टैग को स्कैन करता है। अगर फास्टैग में बैलेंस कम है या वह ब्लैकलिस्टेड है, तो सिस्टम तुरंत उस गाड़ी के रजिस्ट्रेशन नंबर (VRN) को रिकॉर्ड कर लेता है। भविष्य में आने वाले ‘मल्टी-लेन फ्री फ्लो’ (MLFF) सिस्टम में तो बैरियर भी नहीं होंगे, वहां हाई-डेफिनिशन कैमरे सीधे आपकी नंबर प्लेट की फोटो खींच लेंगे। 2. NPCI और बैंक को सूचना: टोल प्लाजा का सर्वर यह जानकारी नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (NETC) को भेजता है, जिसे एनपीसीआई (NPCI) मैनेज करता है। यहां से पता चलता है कि किस बैंक के फास्टैग से पैसा कटना था और क्यों नहीं कटा। 3. ‘वाहन’ पोर्टल के साथ डेटा सिंक: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अपने ‘वाहन’ डेटाबेस को टोल कलेक्शन सिस्टम के साथ सिंक कर दिया है। जैसे ही कोई टोल अनपेड रह जाता है, एनपीसीआई उस डेटा को मंत्रालय के सर्वर पर भेज देता है। वहां गाड़ी के इंजन नंबर और चेसिस नंबर के आधार पर उस बकाया राशि को आपके डिजिटल रिकार्ड में जोड़ दिया जाता है। अनपेड टोल यूजर’ की नई परिभाषा तय हुई सरकार ने नियमों में ‘अनपेड टोल यूजर’ शब्द को भी परिभाषित किया है। इसके तहत, यदि किसी वाहन की आवाजाही इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ETC) सिस्टम यानी फास्टैग जैसे माध्यमों से रिकॉर्ड की गई है, लेकिन उसका भुगतान नेशनल हाईवे एक्ट, 1956 के अनुसार नहीं मिला है, तो उसे बकाया माना जाएगा। यानी अगर आपके फास्टैग में बैलेंस कम था और आपने टोल पार कर लिया, तो वह बकाया राशि आपकी गाड़ी के रिकॉर्ड से जुड़ जाएगी। बिना बैरियर के टोल वसूली की तैयारी सरकार का यह कदम भविष्य में शुरू होने वाले ‘मल्टी-लेन फ्री फ्लो’ (MLFF) टोलिंग सिस्टम के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस सिस्टम में हाईवे पर कोई फिजिकल टोल प्लाजा या बैरियर नहीं होगा। गाड़ियां तेज रफ्तार में हाईवे से गुजरेंगी और लगे हुए कैमरे और सेंसर अपने आप टोल काट लेंगे। इससे टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारें खत्म हो जाएंगी और ईंधन की बचत होगी। चूंकि बिना बैरियर के टोल वसूली में कोई गाड़ी को मौके पर रोक नहीं पाएगा, इसलिए सरकार ने इसे गाड़ी के कागजों (NOC और फिटनेस) से जोड़ दिया है ताकि लोग खुद ही समय पर भुगतान करें। फॉर्म 28 में बड़ा बदलाव किया गया एनओसी (NOC) के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 28 को भी अपडेट कर दिया गया है। अब वाहन मालिक को इस फॉर्म में खुद यह घोषणा करनी होगी कि उसकी गाड़ी पर कोई टोल बकाया नहीं है। इसके साथ ही गाड़ी मालिक को संबंधित टोल विवरण भी देना होगा। डिजिटल तरीकों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने यह भी प्रावधान किया है कि फॉर्म 28 के कुछ हिस्से अब ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक तरीके से भी जारी किए जा सकेंगे। ये खबर भी पढ़ें संसद में गडकरी बोले- सालभर में टोल बूथ खत्म होंगे:बैरियर लेस सिस्टम लागू होगा, 10 जगह पायलट प्रोजेक्ट शुरू केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में गुरुवार को बताया कि अगले एक साल में हाईवे पर मौजूदा टोल वसूली सिस्टम खत्म हो जाएगा। उसकी जगह पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक, बैरियर लेस टोल सिस्टम लागू किया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें
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