फोनपे के ₹12,000 करोड़ के IPO को SEBI की मंजूरी:मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे; डिजिटल पेमेंट कंपनियों में दूसरा बड़ा IPO होगा

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डिजिटल पेमेंट और UPI मार्केट की सबसे बड़ी कंपनी फोनपे जल्द ही अपना IPO लाएगी। इसके लिए कंपनी को शेयर बाजार रेगुलेटर SEBI से अप्रूवल मिल गया है। इस मंजूरी के बाद अब कंपनी जल्द ही अपना अपडेटेड ड्राफ्ट पेपर (DRHP) फाइल करेगी। यह आईपीओ करीब ₹12,000 करोड़ (1.35 बिलियन डॉलर) का हो सकता है। कंपनी की कुल वैल्यूएशन 15 बिलियन डॉलर (करीब ₹1.33 लाख करोड़) आंकी गई है। फोनपे पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बाजार में उतरेगी। इसका मतलब है कि कंपनी कोई नए शेयर जारी नहीं करेगी, बल्कि इसके मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। डिजिटल पेमेंट कंपनियों में यह साल 2021 में आए पेटीएम (₹18,000 करोड़) के बाद भारत का दूसरा सबसे IPO होगा। IPO से ₹12,000 करोड़ जुटाने की तैयारी IPO के जरिए बड़े निवेशक जैसे वॉलमार्ट, टाइगर ग्लोबल और माइक्रोसॉफ्ट अपनी कुल 10% हिस्सेदारी बेच सकते हैं। वॉलमार्ट फिलहाल कंपनी में 73% से ज्यादा की हिस्सेदारी रखता है। इस आईपीओ के लिए कंपनी ने कोटक महिंद्रा कैपिटल, सिटी बैंक, मॉर्गन स्टेनली और जेपी मॉर्गन जैसे बड़े बैंकों को अपना सलाहकार नियुक्त किया है। UPI मार्केट में नंबर 1 कंपनी ने फोनपे फोनपे की सबसे बड़ी ताकत इसका यूपीआई (UPI) मार्केट में दबदबा है। देश के कुल डिजिटल पेमेंट में कंपनी की हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत है। इसकी सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी गूगल पे 35% हिस्सेदारी के साथ दूसरे नंबर पर है। फोनपे हर महीने करीब 1000 करोड़ ट्रांजैक्शन प्रोसेस करता है। इन ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू हर महीने ₹12 लाख करोड़ से ज्यादा होती है। कंपनी के पास फिलहाल 53 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड यूजर्स हैं। अप्रैल में फोनपे ने खुद को पब्लिक कंपनी में बदल लिया था 16 अप्रैल को फोनपे ने खुद को प्राइवेट से पब्लिक कंपनी में बदल लिया था। ये प्रोसेस भारतीय शेयर बाजार में लिस्टिंग के लिए जरूरी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। फोनपे ने फरवरी में IPO की प्लानिंग शुरू की थी। इससे पहले कंपनी ने दिसंबर 2022 में सिंगापुर से भारत में अपना मुख्यालय शिफ्ट किया था। इसके साथ ही कंपनी ने अपने नॉन-पेमेंट बिजनेस को अलग सब्सिडियरी कंपनियों बांट दिया था।

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