जोमैटो की पैरेंट कंपनी इटरनल के फाउंडर दीपिंदर गोयल ने ग्रुप CEO के पद से हटने का फैसला किया है। उनकी जगह अब ब्लिंकिट के CEO अलबिंदर ढींडसा नए ग्रुप CEO होंगे। कंपनी ने बुधवार, 21 जनवरी को स्टॉक एक्सचेंज को इसकी जानकारी दी। गोयल बोले- नए रिस्की आइडिया पर करना है काम CEO पद से इस्तीफे की वजह बताते हुए दीपिंदर ने कहा- मैं कुछ ऐसे नए आइडिया पर काम करना चाहता हूं जिनमें जोखिम ज्यादा है और बहुत सारे प्रयोग की जरूरत है। इस तरह के आइडिया को इटरनल जैसी पब्लिक लिस्टेड कंपनी के दायरे से बाहर रहकर करना ही बेहतर है। बोर्ड में बने रहेंगे गोयल, वाइस चेयरमैन की भूमिका भले ही दीपिंदर गोयल CEO पद छोड़ रहे हैं, लेकिन वे कंपनी से पूरी तरह अलग नहीं हो रहे हैं। शेयरधारकों की मंजूरी मिलने के बाद वे कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में वाइस चेयरमैन के रूप में काम करेंगे। गोयल ने कहा, “मैंने अपनी जिंदगी के करीब 18 साल इस कंपनी को बनाने में दिए हैं। मैं लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी, कल्चर और लीडरशिप डेवलपमेंट से जुड़ा रहूंगा।” स्पेस-टेक और हेल्थ सेक्टर में कर रहे निवेश दीपिंदर गोयल का रुझान इटरनल के बाहर भी कई सेक्टर्स में है। खबरों के मुताबिक, वे स्पेस-टेक कंपनी ‘पिक्सेल’ में करीब ₹210 करोड़ का व्यक्तिगत निवेश कर सकते हैं। इसके अलावा वे लंबी उम्र और स्वास्थ्य से जुड़ी रिसर्च के लिए ‘कंटिन्यू’ और एविएशन सेक्टर में ‘एलएटी एयरोस्पेस’ जैसी कंपनियां भी चला रहे हैं। अलबिंदर ढींडसा पर क्यों जताया भरोसा? गोयल ने अलबिंदर की तारीफ करते हुए कहा कि ब्लिंकिट को घाटे से उबारने और उसे सफल बनाने के पीछे अलबिंदर की मेहनत है। गोयल ने लिखा, “अलबिंदर में एक मंझे हुए फाउंडर का डीएनए है और काम को एग्जीक्यूट करने की उनकी क्षमता मुझसे कहीं ज्यादा है।’ शेयरहोल्डर्स को नुकसान नहीं, गोयल ने छोड़े ESOPs कंपनी के भविष्य और शेयरहोल्डर्स के भरोसे को लेकर गोयल ने कहा कि उनका आर्थिक भविष्य अभी भी इटरनल से ही जुड़ा हुआ है। इस ट्रांजिशन के हिस्से के रूप में, गोयल ने अपने सभी अनवेस्टेड ESOPs कंपनी के पूल में वापस कर दिए हैं। इससे कंपनी के अगले दौर के लीडर्स के लिए वेल्थ क्रिएशन के मौके बनेंगे और मौजूदा शेयरहोल्डर्स की हिस्सेदारी कम नहीं होगी। क्या इटरनल के कामकाज में कोई बदलाव आएगा? दीपिंदर गोयल ने भरोसा दिलाया कि कंपनी का काम करने का तरीका नहीं बदलेगा। इटरनल का स्ट्रक्चर पहले से ही डिसेंट्रलाइज्ड है। यानी कंपनी के तहत आने वाले हर बिजनेस (जैसे जोमैटो, ब्लिंकिट आदि) के अपने CEO हैं, जिनके पास काम करने की पूरी आजादी है। अलबिंदर के ग्रुप CEO बनने के बाद भी ब्लिंकिट ग्रुप की सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी रहेगी।
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