बजट में अब बस इम्पोर्ट ड्यूटी के घटने-बढ़ने से सामानों के दाम थोड़े बहुत ऊपर-नीचे होते हैं। ज्यादातर चीजों के दाम GST काउंसिल तय करती है। समझते हैं इस बजट से क्या सस्ता हुआ और क्या महंगा… सस्ता 1. कैंसर की दवाइयां सस्ती: 17 लाइफ सेविंग ड्रग्स पर कस्टम ड्यूटी खत्म सरकार ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 17 दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी हटा दी है। इसके अलावा, 7 दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए बाहर से मंगवाई जाने वाली दवाओं और स्पेशल फूड पर भी अब कोई टैक्स नहीं लगेगा। इससे उन परिवारों को बड़ी आर्थिक मदद मिलेगी जो इलाज के लिए महंगी विदेशी दवाओं पर निर्भर हैं। 2.माइक्रोवेव ओवन सस्ते: पुर्जों पर ड्यूटी घटी, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बढ़ेगी घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में कुछ अहम बदलाव किए हैं। अब माइक्रोवेव ओवन बनाने में इस्तेमाल होने वाले खास पार्ट्स पर कस्टम ड्यूटी कम कर दी गई है। इससे आने वाले दिनों में माइक्रोवेव की कीमतों में कमी आ सकती है। सरकार का लक्ष्य है कि भारत कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के मामले में दुनिया का हब बने। 3. EV बैटरी और सोलर पैनल सस्ते: इसे बनाने का कच्चा माल हुआ टैक्स फ्री एनर्जी ट्रांजैक्शन को देखते हुए सरकार ने लिथियम-आयन बैटरी बनाने वाली मशीनों पर मिलने वाली टैक्स छूट का दायरा बढ़ा दिया है। अब बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के लिए इस्तेमाल होने वाले सामान पर भी ड्यूटी नहीं लगेगी। वहीं, सोलर ग्लास बनाने में इस्तेमाल होने वाले ‘सोडियम एंटीमोनेट’ पर भी ड्यूटी हटा दी गई है, जिससे देश में सोलर पैनल बनाना सस्ता होगा। 4. जूते, कपड़े सस्ते हो सकते हैं: एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए कच्चे माल पर छूट एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए समुद्री उत्पाद, लेदर और टेक्सटाइल सेक्टर के लिए घोषणाएं हुई हैं.. सस्ता क्यों होगा: जब कंपनियों को सामान बनाने के लिए कच्चा माल सस्ता मिलेगा, तो प्रॉडक्शन की लागत घटेगी। अगर कंपनियां इसका फायदा ग्राहकों तक पहुंचाती हैं, तो लेदर के जूते, स्पोर्ट्स शूज और सी-फूड की कीमतें घट सकती है या कम से कम दाम स्थिर रहेंगे। 5. विदेश घूमना सस्ता होगा: सरकार ने टैक्स घटाकर 2% किया अब विदेश यात्रा के ‘टूर पैकेज’ बुक करना सस्ता हो जाएगा। पहले 10 लाख रुपए तक के खर्च पर 5% और उससे ज्यादा पर 20% टैक्स (TCS) लगता था। इसे अब घटाकर सीधा 2% कर दिया गया है। अब इसमें रकम की कोई लिमिट भी नहीं है। 6. एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस सस्ता: पुर्जों पर कस्टम ड्यूटी हटी नागरिक उड्डयन को बढ़ावा देने के लिए एयरक्राफ्ट बनाने में इस्तेमाल होने वाले पुर्जों और कंपोनेंट्स पर कस्टम ड्यूटी हटा दी गई है। डिफेंस सेक्टर में भी एयरक्राफ्ट के मेंटेनेंस और रिपेयरिंग (MRO) के लिए मंगवाए जाने वाले कच्चे माल पर अब टैक्स नहीं देना होगा। इससे देश में हवाई जहाज बनाने और उनकी मरम्मत करने की लागत कम होगी। 7. विदेशी सामान मंगाना सस्ता: पर्सनल यूज की चीजों पर टैक्स घटा विदेश से अपने निजी इस्तेमाल के लिए सामान मंगवाने मंगाना सस्ता हो जाएगा। सरकार ने ऐसे सामान पर लगने वाले टैक्स को 20% से घटाकर 10% कर दिया है। महंगा TCS का मतलब है ‘सोर्स पर टैक्स कलेक्शन’। यह एक तरह का एडवांस इनकम टैक्स है। दुकानदार जो 2% टैक्स अभी सरकार को देगा, उसे वह साल के आखिर में अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते समय एडजस्ट कर सकता है। STT ऐसा टैक्स है जो आपके हर सौदे (खरीदने और बेचने) पर लगता है। टैक्स दरें बढ़ने से अब आपको एक ही ट्रांजैक्शन के लिए पहले के मुकाबले ज्यादा पैसे चुकाने होंगे। नॉलेज पार्ट: GST काउंसिल तय करती है ज्यादातर चीजों के दाम 22 सितंबर 2025 से GST के चार स्लैब को घटाकर दो कर दिया था। अब केवल 5% और 18% के स्लैब में GST लगता है। GST काउंसिल की 56वीं मीटिंग में इस पर फैसला लिया गया था। इससे घी, पनीर खरीदने से लेकर कार और AC खरीदना भी सस्ता हो गया है। अब दो जरूरी सवालों के जवाब… सवाल 1: अगर बजट में ड्यूटी आज बदली, तो क्या दुकान पर सामान कल से ही सस्ता मिलने लगेगा? जवाब: नहीं। यह सबसे बड़ा भ्रम है। बजट में टैक्स बदलने का असर ‘नए स्टॉक’ पर पड़ता है। जो सामान दुकानदार की शेल्फ पर पहले से रखा है, वह पुरानी कीमत पर ही बिकेगा। बजट का असर दिखने में समय लगता है। वहीं दाम घटना या बढ़ना तय नहीं होता। यह पूरी तरह कंपनियों पर निर्भर करता है। कई बार सरकार ड्यूटी घटाती है, लेकिन कंपनियां अपना प्रॉफिट मार्जिन बढ़ाने के लिए कीमतें कम नहीं करतीं। इसी तरह, अगर कच्चा माल अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगा हो जाए, तो टैक्स घटने के बावजूद दाम स्थिर रह सकते हैं या बढ़ भी सकते हैं। यानी, कुछ भी तय नहीं होता। सवाल 2: 22 सितंबर 2025 को जो GST बदलाव हुए, क्या बजट उन्हें बदल सकता है? जवाब: नहीं। बजट में वित्त मंत्री के पास GST स्लैब बदलने का अधिकार नहीं होता। इसके लिए GST काउंसिल की अलग से मीटिंग होती है। बजट केवल इम्पोर्ट ड्यूटी को घटा या बढ़ा सकता है।
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