बिहार को मिला 1.40 लाख करोड़:गंगा किनारे डेवलप होंगे बाजार, बनेगा हाई स्पीड कॉरिडोर, 9 पॉइंट में जानें बजट में क्या-क्या मिला

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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट 2026-27 पेश किया। इसमें बिहार के लिए किसी विशेष पैकेज का ऐलान नहीं हुआ, लेकिन कई घोषणाएं ऐसी हैं, जिनसे लंबे समय तक राज्य को लाभ मिलेगा। गंगा नदी के किनारे बाजार डेवलप होंगे, हाई स्पीड कॉरिडोर बनेगा। बजट भाषण में की गई घोषणाओं को देखें तो राज्य को इंफ्रास्ट्रक्चर, गंगा-आधारित अर्थव्यवस्था, शहरों के विकास, ग्रामीण रोजगार और राज्यों को मिलने वाली हिस्सेदारी के जरिए कई अहम फायदे दिए गए हैं। 1.40 लाख करोड़ रुपए मिले हैं। मोदी सरकार ने बिहार को क्या दिया है? राज्य में विकास के लिए क्या-क्या होगा? 9 पॉइंट में समझें 1- गंगा कॉरिडोर से माल ढुलाई, बढ़ेगा कारोबार बजट में इनलैंड वाटर वे, फ्रेट कॉरिडोर और लॉजिस्टिक्स सुधारों से जुड़ी घोषणाएं की गई हैं। इनका बिहार पर असर पड़ेगा। गंगा नदी के जरिए सस्ता परिवहन मिलने से कृषि उत्पाद, सीमेंट, कोयला और निर्माण सामग्री लाने-ले जाने की लागत घटेगी। बिहार से सामान गंगा नदी के जरिए कोलकाता बंदरगाह पहुंचाए जा सकेंगे। इससे निर्यात करना आसान होगा। बिहार में उद्योग लगाने की संभावनाएं बढ़ेंगी। राज्य का व्यापारिक नेटवर्क मजबूत होगा। क्या फायदाः गंगा नदी से माल ढुलाई की व्यवस्था होने से बिहार के इंडस्ट्रियलाइजेशन को तेजी मिलेगी। राज्य के उत्पादों का निर्यात बढ़ेगा। आर्थिक समृद्धि आएगी। 2- पटना में इनलैंड वाटर वे, शिप रिपेयर इकोसिस्टम बजट में गंगा जलमार्ग को बढ़ावा देने के तहत पटना में इनलैंड वाटर वे के लिए शिप रिपेयर इकोसिस्टम स्थापित करने का ऐलान किया गया है। यह कदम गंगा के जरिए माल ढुलाई, यात्री परिवहन और लॉजिस्टिक्स को मजबूत करेगा। अभी तक इनलैंड शिपिंग के लिए मरम्मत और मेंटेनेंस की सुविधाएं सीमित हैं, जिससे लागत बढ़ती है। पटना में यह इकोसिस्टम बनने से जहाजों की मरम्मत, स्पेयर पार्ट्स, टेक्निकल सर्विस और सप्लाई चेन विकसित होगी। क्या फायदाः इसका सीधा फायदा पटना, भोजपुर, बेगूसराय, मुंगेर और भागलपुर जैसे गंगा किनारे के जिलों को मिलेगा। स्थानीय स्तर पर इंडस्ट्रियल गतिविधि बढ़ेगी। 3. वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बजट में 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की गई है, जिनमें वाराणसी-सिलीगुड़ी रूट शामिल है। यह रूट बिहार से गुजरेगा। बक्सर, आरा, पटना, किशनगंज आदि जिलों के लाखों लोग रोजगार, व्यापार और शिक्षा के लिए इसी रूट का इस्तेमाल करते हैं। क्या फायदाः बिहार के लोगों के लिए पूर्वोत्तर के राज्यों तक तेज कनेक्टिविटी मिलेगी। राज्य के लाखों लोग असम और नॉर्थ ईस्ट के दूसरे राज्यों में रोजगार के लिए जाते हैं। वहीं, वाराणसी जाने में लगने वाला समय भी घटेगा। 4. बिहार के 8 शहरों का होगा विकास बजट में टियर-2 और टियर-3 के शहरों को CER (City Economic Region) के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई है। पटना, मुजफ्फरपुर, गया समेत बिहार के 8 शहर इस कैटेगरी में आते हैं। हर CER को 5 साल में 5,000 करोड़ रुपए तक की सहायता दी जाएगी। यह मॉडल शहरों को आसपास के ग्रामीण इलाकों से जोड़कर रोजगार और निवेश का क्लस्टर तैयार करने पर आधारित है। क्या फायदाः बिहार के पटना, गया, भागलपुर और मुजफ्फरपुर जैसे शहर इस योजना के दायरे में होंगे। यहां हाउसिंग, ट्रांसपोर्ट, इंडस्ट्रियल एरिया और सर्विस सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा। राज्य के लोगों को अपने पास के शहर में ही काम मिलेगा। रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में नहीं जाना होगा। 5. बिहार को मिला 1.4 लाख करोड़ रुपए 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू करते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों को टैक्स का 41% हिस्सा देने का प्रावधान बरकरार रखा है। वित्त वर्ष 2026-27 में बिहार को केंद्र सरकार द्वारा टैक्स के रूप में वसूली गई राशि में से 1.40 लाख करोड़ दिए गए हैं। क्या फायदाः बिहार जैसे कम राजस्व वाले राज्य के लिए यह बेहद अहम है। बिहार सरकार अपनी बड़ी योजनाएं चलाने के लिए केंद्र से मिलने वाली मदद पर निर्भर है। केंद्र की मदद से राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और ग्रामीण विकास जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा कर पाएगी। 6. पंचायत और नगर निकायों को सीधा फंड बजट में वित्त आयोग अनुदान (Finance Commission Grants) के तहत पंचायतों, नगर निकायों और आपदा प्रबंधन के लिए सीधा फंड देने का प्रावधान किया गया है। क्या फायदाः बिहार के पंचायतों और नगर निकायों को सीधे केंद्र सरकार से पैसा मिलेगा। यह पानी सप्लाई, सफाई, सड़क, स्ट्रीट लाइट और ड्रेनेज जैसी स्थानीय जरूरतों को पूरा करने के लिए खर्च होगा। इस फंड से विकास के काम होंगे। 7. MSME के लिए 10,000 करोड़ रुपए का ग्रोथ फंड बजट में MSME सेक्टर को मजबूती देने के लिए 10,000 करोड़ रुपए का ग्रोथ फंड घोषित किया गया है। साथ ही TReDS प्लेटफॉर्म को अनिवार्य बनाकर छोटे उद्योगों को समय पर भुगतान तय करने की कोशिश की गई है। क्या फायदाः बिहार के टियर-2 और टियर-3 शहरों में छोटे उद्योगों की संख्या ज्यादा है। ग्रोथ फंड से इन्हें मदद मिलेगी। उद्यमियों को कारोबार बढ़ाने के लिए कम ब्याज पर पैसा मिलेगा। इससे रोजगार के मौके बढ़ेंगे। पलायन कम होगा। 8. ग्रामीण रोजगार और स्किलिंग पर जोर बजट में ग्रामीण रोजगार, स्किल डेवलपमेंट और प्रोफेशनल सपोर्ट मॉडल को बढ़ावा दिया गया है। कॉरपोरेट मित्र जैसे मॉडल टियर-2 और टियर-3 के शहरों में पेशेवर सेवाएं उपलब्ध कराएंगे। क्या फायदाः बिहार की तीन चौथाई से अधिक आबादी गांव में रहती है। गांव में रोजगार के अवसर बढ़ने से युवाओं को उनके घर के पास ही काम मिलेगा। उन्हें काम की तलाश में बाहर नहीं जाना पड़ेगा। गांव की स्थिति सुधरेगी। स्किल डेवलपमेंट से युवाओं को अच्छी नौकरी मिलेगी। 9. बिहार को बड़ा पैकेज नहीं, लेकिन स्थायी सपोर्ट बजट में बिहार को कोई तात्कालिक बड़ा पैकेज नहीं मिला, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर, टैक्स हिस्सेदारी, शहरी-ग्रामीण फंडिंग और रोजगार योजनाओं के जरिए फायदा दिया गया है। क्या फायदाः यह बजट बिहार के लिए घोषणाओं से ज्यादा ढांचे पर आधारित है। इसका असर आने वाले वर्षों में दिख सकता है। इनसे राज्य में उद्योग लगाने और पहले से चल रहे उद्योगों को बढ़ाने में मदद मिलेगी। राज्य की आर्थिक हालत ठीक होगी। गरीबी कम होगी। बजट में बिहार के हाथ निराशा लगी: एनके चौधरी वरिष्ठ अर्थशास्त्री एनके चौधरी बताते हैं, ‘इस बजट में बिहार के हाथ केवल निराशा लगी है। अगर शिप रिपेयरिंग सेंटर को छोड़ दें तो ऐसा कुछ भी नहीं है जो खासकर बिहार के लिए है।’ उन्होंने कहा, ‘बिहार को विशेष पैकेज की उम्मीद थी, लेकिन इस बार वो भी नहीं मिला। बिहार बिना केंद्र की मदद के विकसित राज्य की श्रेणी में शामिल नहीं हो सकता। क्षेत्रीय असमानता के कारण बिहार लगातार विकसित राज्यों से पिछड़ रहा है।’ राष्ट्रीय स्तर पर दूरगामी असर करने वाला है बजट बिहार के उद्यमी केपीएस केसरी ने कहा, ‘सिर्फ बिहार के दृष्टिकोण से देखें तो बजट में कुछ खास नहीं है। बजट बिहार स्पेसिफिक नहीं है। यह राष्ट्रीय स्तर पर दूरगामी असर करने वाला बजट है। बजट में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में प्रतिद्वंदिता और उत्पादकता कैसे वैश्विक स्तर का हो, इस पर फोकस किया गया है। इसके साथ ही हर सेक्टर के स्किल को कैसे बेहतर बनाया जाए, इसके भी समाधान किए गए हैं।’
पटना यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ अविरल पांडेय ने कहा, ‘बजट लंबे समय के लिए आर्थिक क्षमता निर्माण और संरचनात्मक सुधार पर केंद्रित है। फोकस सीधे रोजगार योजनाओं की जगह रोजगार पैदा करने वाला तंत्र तैयार करने पर है। MSME के लिए क्रेडिट गारंटी और कॉरपोरेट मित्र जैसी योजनाएं पेश की गईं हैं। इससे MSME क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ेगी।’

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