ब्यूटी-पर्सनल केयर बाजार 2030 तक 3.8 लाख करोड़ का होगा:परफ्यूम ने डिओडोरेंट को पीछे छोड़ा; बॉडी वॉश की ग्रोथ भी साबुन से ज्यादा

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ब्यूटी प्रोडक्ट्स अब तेजी से भारतीय उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन रहे हैं। बॉडी वॉश और सनस्क्रीन भी क्विक डिलीवरी ऐप से आने लगी है। रेडसीर स्ट्रेटजी कंसल्टेंट्स की रिपोर्ट के मुताबिक ऑनलाइन ब्यूटी और पर्सनल केयर बाजार 35% सालाना की दर से बढ़कर 56,000 करोड़ रुपए पहुंच गया है। लेकिन इस ग्रोथ की असली कहानी दो हिस्सों में बंटी है: एक तरफ आदत है, तो दूसरी तरफ इच्छा। ग्रूमिंग अब आदत बन चुका है और इस सेगमेंट की ग्रोथ सबसे ज्यादा 37% है। मेकअप और परफ्यूम की ग्रोथ 30% है। देश का कुल बीपीसी बाजार 2030 तक करीब 3.8 लाख करोड़ का होगा। यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा और भारत की सबसे तेज बढ़ती रिटेल कैटेगरी है। तेजी से बढ़ती कैटेगरीज (वित्त वर्ष 2025-26) – बॉडी केयर 65-70% – बॉडी वॉश 60-65% – सनस्क्रीन 55-60% – नेल मेकअप 50% – परफ्यूम 30-35% – डिओडोरेंट 20% सिर्फ चेहरा नहीं, अब पूरे शरीर की देखभाल का ट्रेंड बॉडी वॉश 60-65% सालाना की दर से बढ़ रहा है, जबकि साबुन की ग्रोथ 40-45% है। खुशबू, स्किन केयर, सेल्फ-केयर। बॉडी केयर (लोशन, क्रीम) 65-70% की तेज ग्रोथ पर है। अब भारतीय सिर्फ चेहरे की नहीं, पूरे शरीर की देखभाल करने लगे हैं। – सनस्क्रीन की कहानी और भी दिलचस्प है। एक समय गर्मियों में छत पर जाते वक्त लगाई जाती थी। अब यह रोज सुबह के रूटीन का हिस्सा है। 55-60% ग्रोथ इसी बदलाव का सबूत है। बदल रहा है ग्रूमिंग सेंस, नेल आर्ट का क्रेज बढ़ रहा है ऑनलाइन ब्यूटी और पर्सनल केयर बाजार में परफ्यूम का हिस्सा अब बढ़कर 6 फीसदी पहुंच गया, जबकि डिओडोरेंट 3% से नीचे खिसक गया। यह महज आंकड़ों का फेरबदल नहीं है। यह दिखाता है कि भारतीय उपभोक्ता के लिए खुशबू अब पसीना रोकने का साधन नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का हिस्सा बन चुकी है। {नेल मेकअप भी 50% की रफ्तार से बढ़ रहा है। घर पर नेल आर्ट करना अब हजारों युवाओं की पहचान और शौक दोनों है। 10 मिनट में ब्यूटी प्रोडक्ट, एक साल में दोगुना बढ़ा ट्रेंड क्विक कॉमर्स का ब्यूटी बाजार में हिस्सा वित्त वर्ष 2025 के 9% से बढ़कर 2026 में 18% हो गया। यानी एक साल में दोगुना। बॉडी केयर और बॉडी वॉश में क्विक कॉमर्स का हिस्सा 20-25% है। – जेन जी और जेन एल्फा 2030 तक बीपीसी खर्च का 50% हिस्सा देंगे। 150 से ज़्यादा नए ऑनलाइन-बिल्ट ब्रांड्स 2030 तक ₹100 करोड़+ रेवेन्यू पार करेंगे, कुल कैटेगरी का 25%+ हिस्सा इनके पास होगा।

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