सरकार बोली- चीनी जमाखोरी से महंगी हुई, इथेनॉल कारण नहीं:एक महीने में कीमत ₹55 पार, अक्टूबर में 10 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य

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सरकार ने उन दावों को खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि चीनी से एथेनॉल बनाने की वजह से बाजार में इसके दाम बढ़े हैं। खाद्य और उपभोक्ता मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि कम उत्पादन, त्योहारी सीजन की मांग और जमाखोरी की वजह से कीमतें बढ़ी हैं। चीनी के बढ़ते दाम को रोकने के लिए स्टॉक लिमिट और ड्यूटी फ्री इंपोर्ट जैसे कदम उठाए गए हैं। एथेनॉल के लिए चीनी का इस्तेमाल घटा मंत्रालय ने कहा कि चीनी की बढ़ती कीमतों को एथेनॉल बनाने में इसके इस्तेमाल से जोड़ना पूरी तरह गलत है। पेट्रोल में मिलाने के लिए चीनी से एथेनॉल बनाने का हिस्सा 2022-23 सीजन के 12% से घटकर 2025-26 सीजन में करीब 9% रह गया है। मौजूदा समय में देश के कुल एथेनॉल उत्पादन का लगभग 75% हिस्सा अनाज, खासकर मक्के से आ रहा है। मिलों और किसानों को कैसे हुआ फायदा? भारत में हर साल करीब 32-34 मिलियन टन चीनी बनती है और इसकी खबत 28-29 मिलियन टन है। पहले यह एक्स्ट्रा चीनी मिलों में फंसी रहती थी, जिससे उनके पैसे ब्लॉक हो जाते थे और वे गन्ना किसानों का भुगतान नहीं कर पाते थे। अब सरकार इस एक्स्ट्रा चीनी और गन्ने का इस्तेमाल पेट्रोल में मिलाने वाले इथेनॉल को बनाने में कर रही है। इससे मिलों के पास पैसा आया और किसानों को समय पर भुगतान मिलने लगा। 20 अगस्त 2026 तक इस सीजन का 97% बकाया किसानों को चुकाया जा चुका है। सरकार की बची भारी सब्सिडी मिलों की कमाई बढ़ने से अब उन्हें सरकार से मदद की जरूरत नहीं पड़ती। यही वजह है कि सरकार ने 2014 से 2021 के बीच मिलों को 14,600 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी थी, लेकिन साल 2021-22 के बाद से सरकार को 1 रुपए की भी नई सब्सिडी देने की जरूरत नहीं पड़ी है। चीनी भारत में ₹7.50 महंगी, ग्लोबल मार्केट में 16% की तेजी देश के रिटेल बाजार में पिछले एक महीने में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। 20 जुलाई को जो चीनी ₹48.18 प्रति किलो थी, वह 20 अगस्त को बढ़कर ₹55.70 प्रति किलो पर पहुंच गई। चीनी की यह किल्लत सिर्फ भारत में नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में है। सरकारी अनुमान के मुताबिक, साल 2026-27 में वैश्विक स्तर पर करीब 33 लाख टन चीनी की कमी हो सकती है। दुनियाभर में सप्लाई कम होने की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चीनी की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ी हैं। सिर्फ 50 दिन में (30 जून से 20 अगस्त) ग्लोबल मार्केट में चीनी का दाम 474 डॉलर से बढ़कर 552 डॉलर प्रति टन (16% से ज्यादा) पर पहुंच गया है। 15 दिन से ज्यादा स्टॉक रखने पर सरकार ने चीनी व्यापारियों और डीलरों पर स्टॉक रखने की सीमा लागू कर दी है। नए नियमों के तहत महीने में 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का कारोबार करने वाले डीलर 15 दिन से अधिक की खपत का स्टॉक जमा करके नहीं रख सकते। इसके अलावा तीन और कदम उठाए हैं… गन्ने की पेराई 15 अक्टूबर से शुरू होगी त्योहारों पर बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ाने और दाम कंट्रोल करने के लिए सरकार ने मिलों को 15 अक्टूबर से ही गन्ने की पेराई शुरू करने की सलाह दी है। वक्त से पहले काम शुरू होने की वजह से अक्टूबर महीने में चीनी का उत्पादन 10 लाख टन से ज्यादा होने की उम्मीद है। आम तौर पर इस महीने सिर्फ 3 से 4 लाख टन चीनी ही बन पाती थी। फायदा क्या होगा? बाजार में इस एक्स्ट्रा चीनी के आने से त्योहारों के दौरान सप्लाई मजबूत रहेगी, जिससे चीनी की किल्लत नहीं होगी और कीमतें भी काबू में रहेंगी।

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