क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच ने 2026-27 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 6.9% कर दिया है। फिच का कहना है कि अप्रैल-जून तिमाही में GDP 7.8% की रफ्तार से बढ़ी थी। यह दिखाता है कि भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत है। हालांकि, फिच का अनुमान है कि आने वाले महीनों में कम बारिश और खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से महंगाई बढ़ सकती है। इस महंगाई पर को कंट्रोल में लाने के लिए रिजर्व बैंक आने वाले अक्टूबर महीने में ब्याज दरों को 0.25% तक बढ़ा सकता है। अगर आरबीआई ब्याज दरें बढ़ाता है, तो बैंकों से मिलने वाले होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन महंगे हो जाएंगे और आपकी महीने की EMI थोड़ी बढ़ सकती है। जून तिमाही में 7.8% विकास दर से इकोनॉमी मजबूत अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और विदेश से सामान खरीदने-बेचने में आ रही रुकावटों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत रही है। इस साल अप्रैल से जून की पहली तिमाही में देश की विकास दर 7.8% रही, जो यह साबित करती है कि भारत सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, फिच का यह भी मानना है कि इस साल के बाकी बचे महीनों में कामकाज की रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है। अक्टूबर में बैंक बढ़ा सकते हैं 0.25% ब्याज दर फिच की रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती कीमतों और सामान की किल्लत को देखते हुए RBI अक्टूबर 2026 की बैठक में ब्याज दरों में 0.25% की बढ़ोतरी कर सकता है। इससे ब्याज दर बढ़कर 5.5% हो जाएगी। एजेंसी का अनुमान है कि यह बढ़ोतरी यहीं नहीं रुकेगी और साल 2027 की शुरुआत तक यह 5.75% तक जा सकती है। हालांकि, हालात सुधरने पर 2028 तक इसके वापस घटकर 5.5% पर आने की उम्मीद है। निजी कंपनियों के निवेश और लोन की मांग में तेजी भले ही बाजार में कुछ चुनौतियां हैं, लेकिन फिच को उम्मीद है कि इस साल प्राइवेट कंपनियां अपने कारोबार में 10% से ज्यादा नया पैसा लगाएंगी। इसके अलावा, जुलाई महीने में बिज़नेस और पर्सनल लोन में 19% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह दिखाता है कि देश में नए बिजनेस शुरू करने, काम बढ़ाने और कंपनियों के विस्तार के लिए लोन की मांग तेजी से बढ़ रही है। फिच ने आने वाली तिमाहियों में ग्रोथ रेट के थोड़ा सुस्त पड़ने के पीछे तीन कारण बताए हैं… 1. फैक्ट्रियों के कामकाज की रफ्तार धीमी देश में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर दोनों की बढ़त जारी है, लेकिन पिछले कुछ समय के मुकाबले इनके काम करने की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है। 2. कम बारिश का ग्रामीण इलाकों पर असर अगर इस साल मानसून में सामान्य से कम बारिश होती है, तो इसका सीधा असर खेती-किसानी पर पड़ेगा। इससे गांव-देहात के लोगों की कमाई घटेगी, जिससे ग्रामीण इलाकों में सामान खरीदने की मांग (खर्च) कम हो सकती है। 3. महंगाई का दबाव खाने-पीने और रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ने से आम इंसान की असली बचत और खरीदारी करने की क्षमता घटती है। जब महंगाई बढ़ती है, तो लोग गैर-जरूरी चीजों पर खर्च कम कर देते हैं, जिससे बाजार में बिक्री पर असर पड़ता है। SP और मूडीज ने भी जताया 7% ग्रोथ का अनुमान फिच से पहले दुनिया की दूसरी बड़ी रेटिंग एजेंसियों ने भी भारत की अर्थव्यवस्था पर भरोसा जताया है। बुधवार को SP ग्लोबल रेटिंग्स ने 2026-27 के लिए भारत की विकास दर 7% रहने का अनुमान लगाया है। पिछले हफ्ते मूडीज ने 7% ग्रोथ की ही बात कही थी। पिछले साल 2025-26 में भारत की आर्थिक विकास दर 7.8% रही थी। इकोनॉमी की सेहत बताती है GDP GDP यानी देश के भीतर एक तय समय में कितनी वैल्यू का सामान बना और कितनी सर्विसेज दी गईं। इसे देश की आर्थिक सेहत का ‘रिपोर्ट कार्ड’ भी कह सकते हैं। इसमें भारतीय कंपनियां ही नहीं, बल्कि देश में काम करने वाली विदेशी कंपनियों का प्रोडक्शन भी जोड़ा जाता है। दो तरह की GDP: रियल और नॉमिनल कैसे की जाती है जीडीपी की गिनती? जीडीपी निकालने के लिए एक खास फॉर्मूले का इस्तेमाल होता है: रेटिंग एजेंसियां क्या हैं? फिच, मूडीज और एसएंडपी जैसी संस्थाएं वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां हैं। इनका मुख्य काम देशों, कंपनियों और सरकारों की आर्थिक स्थिति और उनकी कर्ज चुकाने की क्षमता का विश्लेषण करना है। ये एजेंसियां डेटा और आर्थिक संकेतकों के आधार पर यह बताती हैं कि किसी देश या संस्था में निवेश करना कितना सुरक्षित या जोखिम भरा है।
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