नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के शेयरों की आज 24 सितंबर को स्टॉक मार्केट में धीमी शुरुआत हुई। ये इश्यू प्राइस ₹1,785 के मुकाबले सिर्फ ₹15 रुपए या 0.84% ऊपर ₹1,800 पर लिस्ट हुए। हालांकि, लिस्टिंग के कुछ ही देर बाद इसमें अच्छी खरीदारी देखने को मिली और शेयर 5.14% चढ़कर ₹1,876 के दिन के उच्च स्तर पर पहुंच गया। इस लिस्टिंग के साथ ही देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज अब एक पब्लिकली ट्रेडेड कंपनी बन गया है। 34 लाख से ज्यादा रिटेल निवेशकों को मिले शेयर लिस्टिंग सेरेमनी के दौरान NSE के MD और CEO आशीष कुमार चौहान ने बताया कि इस आईपीओ में 34 लाख से ज्यादा रिटेल निवेशकों को शेयर अलॉट किए गए हैं। चौहान ने कहा कि निवेशकों ने NSE पर जो भरोसा जताया है, उसके लिए हम दिल से आभारी हैं। IPO को कुल 5.71 गुना बोली मिली थी ये IPO कुल 5.71 गुना सब्सक्राइब हुआ था। निवेशकों ने कुल 8.86 करोड़ शेयरों के मुकाबले 50.28 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां लगाईं थी। इसमें सबसे ज्यादा मांग बड़े विदेशी व घरेलू फंड्स यानी QIB की तरफ से आई और उनका कोटा 12.68 गुना भरा। वहीं अमीर निवेशकों यानी NII का हिस्सा 6.55 गुना और आम खुदरा यानी रिटेल निवेशकों का कोटा 1.39 गुना सब्सक्राइब हुआ था। IPO 17 सितंबर से 21 सितंबर तक ओपन हुआ था। प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर था। ₹22,562 करोड़ का यह इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल था। यानी इस IPO में नए शेयर जारी नहीं की गए थे। मौजूदा निवेशकों ने अपने शेयर बेचे हैं।
2027 तक शेयर ₹2,050 तक पहुंचने का अनुमान घरेलू ब्रोकरेज फर्म एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज ने NSE के शेयर पर अपनी ‘Buy’ रेटिंग दी है। एमके ग्लोबल ने सितंबर 2027 के लिए ₹2,050 का टारगेट प्राइस दिया है, जो इसके इश्यू प्राइस से करीब 15% का अपसाइड पोटेंशियल दिखाता है। NSE की लिस्टिंग BSE पर क्यों हुई? NSE ने अपने शेयरों की ट्रेडिंग अपने ही प्लेटफॉर्म पर नहीं की है। इसके बजाय, निवेशक NSE के शेयर BSE पर खरीद और बेच रहे हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों से जुड़े नियम किसी भी एक्सचेंज को अपने खुद के प्लेटफॉर्म पर अपने शेयर लिस्ट करने की इजाजत नहीं देते हैं। आखिर NSE काम क्या करता है? NSE सिर्फ शेयर खरीदने-बेचने का एक प्लेटफॉर्म भर नहीं है। इसका कामकाज इक्विटी, इक्विटी डेरिवेटिव्स, करेंसी डेरिवेटिव्स, कमोडिटीज, डेट सिक्योरिटीज और बाजार से जुड़ी दूसरी सर्विसेज तक फैला हुआ है। इसके बड़े नेटवर्क में क्लियरिंग और सेटलमेंट, इंडेक्स और मार्केट डेटा से जुड़े बिजनेस शामिल हैं। इस एक्सचेंज का दायरा भी काफी बड़ा है। 30 जून 2026 तक NSE के पास 26.14 करोड़ रजिस्टर्ड इनवेस्टर अकाउंट थे और 3,005 कंपनियां लिस्टेड थीं। वित्त वर्ष 2026 में भारत के पूरे कैश-मार्केट कारोबार में अकेले NSE की हिस्सेदारी 92.99% रही।
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