महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने टाटा ट्रस्ट्स को नोटिस जारी कर 12 अक्टूबर तक जवाब मांगा है। यह कार्रवाई ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन द्वारा सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट में गड़बड़ियों के आरोप वाली शिकायत के बाद हुई है। श्रीनिवासन ने 24 सितंबर को मामले की जांच की मांग की थी। श्रीनिवासन के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स अब समाजसेवा के अपने मुख्य काम से भटककर कंपनियों के बिजनेस फैसलों में दखल दे रहा है। ट्रस्टी खुद बड़े कारोबारी सौदों को तय करने, बातचीत करने और उन्हें फाइनल कराने में लगे हैं, जो कि चैरिटी ट्रस्ट के नियमों के खिलाफ है। श्रीनिवासन की शिकायत से जुड़ी 4 बड़ी बातें… टाटा ट्रस्ट्स ने पहले ही याचिका दायर की थी टाटा ट्रस्ट्स ने 30 सितंबर को चैरिटी कमिश्नर के सामने याचिकाएं दाखिल की थीं। ट्रस्ट का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि श्रीनिवासन की शिकायत पर उनका पक्ष सुने बिना कोई भी आदेश पारित न किया जाए। अब ट्रस्ट के पास पक्ष रखने के लिए 12 अक्टूबर तक का समय है। सर रतन टाटा ट्रस्ट से जुड़ा है एक विवाद यह नया विवाद ऐसे समय सामने आया है जब टाटा समूह का एक और ट्रस्ट पहले से ही विवादों में है। इससे पहले, चैरिटी कमिश्नर ने सर रतन टाटा ट्रस्ट में ट्रस्टियों की नियुक्ति को लेकर चल रहे झगड़े के चलते बोर्ड मीटिंग्स पर रोक लगा दी थी। भले ही ये दोनों मामले अलग-अलग हों, लेकिन दोनों की जड़ ट्रस्ट चलाने के तौर-तरीकों से ही जुड़ी है। जवाब के बाद चैरिटी कमिश्नर फैसला लेंगे अब सबकी नजरें 12 अक्टूबर पर हैं, जब टाटा ट्रस्ट्स इन आरोपों पर अपना जवाब देगा। ट्रस्ट की बात सुनने के बाद चैरिटी कमिश्नर यह तय करेंगे कि इस मामले में आगे कोई जांच या कानूनी कार्रवाई करने की जरूरत है या नहीं। नॉलेज बॉक्स: सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) क्या है? 1932 में स्थापित यह टाटा ट्रस्ट्स का एक मुख्य हिस्सा है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य और आपदा राहत में फंड देता है। चैरिटी कमिश्नर की शक्तियां: महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट एक्ट के तहत चैरिटी कमिश्नर को ट्रस्ट्स के कामकाज, फंड और ट्रस्टियों की नियुक्ति में गड़बड़ी की जांच करने का अधिकार होता है।
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