चीन अब इंसानी दिमाग को अपना अगला बड़ा बिजनेस बनाने की तैयारी में है। क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स और फ्यूजन पावर की तरह उसने ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (बीसीआई) को भी भविष्य की उन इंडस्ट्री में गिना है, जिन पर वह दबदबा चाहता है। बीसीआई यानी ऐसी मशीनें, जो दिमाग से संकेत लेती हैं और उसे संकेत भेजती हैं। टेक्नोलॉजी के मामले में अमेरिका के साथ चीन की होड़ का यह नया मोर्चा है। हांगझोउ की स्टार्टअप कंपनी ब्रेनको की प्रदर्शनी में इसकी झलक दिखती है। यहां हाथ गंवा चुका एक व्यक्ति पियानो बजाता है और फिर अपनी बायोनिक बांह आसानी से उतार भी देता है। यह बांह बिना सर्जरी के शरीर से जुड़ जाती है। कृत्रिम पैर वाला एक अन्य शख्स टहलते हुए दर्शकों से पूछता है कि असली पैर कौन-सा है। एक कोने में रिपोर्टर को मास्क पहनाकर दिमाग के अगले हिस्से में बिजली का हल्का करंट दिया गया, ताकि उसे आराम महसूस हो सके। बीसीआई की पहचान अब इलॉन मस्क की न्यूरालिंक से रही है। इसने 2016 में शुरुआत की और वायरलेस ब्रेन इम्प्लांट का ट्रायल करने वाली पहली कंपनी बनी। यह फासला पाटने के लिए चीन सरकारी ताकत झोंक रहा है। चीन की चालू पंचवर्षीय योजना में न्यूरो-टेक शामिल है। 2024 में बीसीआई रिसर्च के नैतिक दिशानिर्देश बने। 2025 में अस्पतालों में इलाज के लिए मानक शुल्क और बिलिंग कोड तय हुए, ताकि टेक्नोलॉजी अपनाना आसान हो। थ्येनचिन यूनिवर्सिटी में इसी साल बीसीआई की पहली अंडरग्रेजुएट क्लास शुरू होगी। यह दुनिया में इस तरह का पहला कोर्स है। मैदान में सैकड़ों चीनी स्टार्टअप और हजारों सप्लायर हैं। न्यूरोएक्सेस पूरी तरह वायरलेस ब्रेन इम्प्लांट के क्लिनिकल ट्रायल पूरे करने वाली पहली स्थानीय कंपनी है। अलीबाबा समर्थित स्टेयरमेड और सरकार समर्थित न्यूकाइबर भी दौड़ में हैं। स्थानीय सरकारें निवेश खींचने में जुटी हैं। आनहुई प्रांत के अफसरों ने 2028 तक इम्प्लांटेड इलेक्ट्रोड के तीन क्लीनिकल ट्रायल मंजूर करने का लक्ष्य रखा है। सबसे बड़ा संकेत नियामकीय रफ्तार का है। शंघाई की न्यूराकल के हाथ की गतिशीलता सुधारने वाले उपकरण को मार्च में मंजूरी मिल गई। यह दुनिया का पहला व्यावसायिक रूप से उपलब्ध सेमी-इनवेसिव बीसीआई इम्प्लांट है। मंजूरी के दो दिन के भीतर स्वास्थ्य विभाग ने इसे मेडिकल इंश्योरेंस कोड दे दिया, यानी बिक्री का रास्ता खुल गया। यानी सरकारी नीति, पढ़ाई, अस्पताल का बिल और इंश्योरेंस, चीन पूरी कड़ी एक साथ जोड़ रहा है। बाजार की असली उम्मीद पहनने वाले उपकरणों से है। करीब 20 कंपनियां नींद सुधारने से लेकर दिमाग से चलने वाले गेमिंग गैजेट तक बेच रही हैं। अभी चीन में इन तीन तरीकों से ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस का इस्तेमाल हो रहा है ब्रेनको की निक्स हे कहती हैं- अब विज्ञान बाधा नहीं है। चुनौती रोजमर्रा के काम आने वाले प्रोडक्ट बनाने की है। चीन के न्यूरो-टेक कारोबारियों को बस यह उम्मीद है कि उपभोक्ता भी अपना दिमाग खुला रखेंगे। वहां 20 कंपनियां ऐसे डिवाइस बेच रही हैं। 1. इनवेसिव – इसमें इलेक्ट्रोड दिमाग के टिश्यूज के भीतर तक जाते हैं। यह गंभीर रूप से दिव्यांग लोगों को सिर्फ सोच से कंप्यूटर चलाने में मदद करता है। 2. सेमी-इनवेसिव – इसमें दिमाग की सतह पर उपकरण लगाया जाता है, भीतर नहीं घुसता। हाथ की गतिविधियों में मदद करने वाले ऐसे उपकरण मंजूरी। 3. नॉन-इनवेसिव – सर्जरी की जरूरत नहीं। उपकरण सिर पर पहना जाता है। दिमागी तरंगें पढ़ता है। इस्तेमाल नींद में मदद और सोच से गेम खेलने में होता है।
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