भारती एंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने कहा कि उनकी कंपनी अप्रूवल की कतार में इलॉन मस्क की स्टारलिंक से काफी आगे है। कंपनी ने 5 साल पहले ही जरूरी मंजूरियों के लिए आवेदन कर दिया था। कंपनी की सैटेलाइट्स भी तैयार हैं। सभी सरकारी मंजूरी मिलते ही तुरंत सर्विसेज शुरू कर देंगे। सुनील मित्तल ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में मस्क के आरोपों पर यह बात कही है। मस्क का आरोप- स्टारलिंक को भारतीय उद्योगपतियों ने रोक रखा है मस्क ने X पर पोस्ट शेयर कर आरोप लगाया था कि उनकी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विसेज स्टारलिंक को भारतीय बाजार में आने से कुछ ओलिगार्क्स यानी उद्योगपतियों ने रोक रखा है। मस्क ने कहा था कि भारत के टेलीकॉम अरबपति आम लोगों पर अपना एकाधिकार और शिकंजा बनाए रखना चाहते हैं। भारती की सैटेलाइट्स 5 साल से तैनात, ग्राउंड नेटवर्क 3 साल से तैयार सुनील मित्तल ने बताया कि भारती का ग्राउंड नेटवर्क पिछले 3 साल से पूरी तरह तैयार है। कंपनी की सैटेलाइट्स पिछले 5 साल से तैनात हैं। जैसे ही सरकार से सभी जरूरी मंजूरियां मिल जाएंगी, भारती तुरंत अपनी सर्विसेज पूरे देश में शुरू करने के लिए तैयार है। मित्तल ने कहा कि भारत में सैटेलाइट कनेक्टिविटी की तैयारियां एडवांस लेवल पर हैं। मंजूरी मिलने के बाद भारती अपनी सर्विसेज का विस्तार उन दूरदराज इलाकों तक भी कर सकती है, जहां मोबाइल नेटवर्क पहुंच नहीं पाते। इसके साथ ही उन्होंने डिजिटल गुड्स और टेलीकॉम सर्विसेज पर टैक्स कम करने की मांग की, ताकि डिजिटल टेक्नोलॉजी देश की आर्थिक ग्रोथ में मदद कर सके। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की अहम भूमिका होती है। मित्तल ने कहा- AI पर जल्द नियम बनाने चाहिए सुनील मित्तल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर जल्दी नियम और नीतियां बनाने की बात कही की। उन्होंने कहा कि AI की रफ्तार इतनी तेज है कि सरकारें उसके हिसाब से नियम तैयार नहीं कर पा रही हैं। भारत भी AI के इस्तेमाल और सुरक्षा के लिए एक कंसल्टेशन पेपर तैयार कर रहा है। मित्तल ने कहा कि AI एजेंट्स अपने तय कंट्रोल से बाहर जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी के फाउंडर्स की ओर से खबरें आ रही हैं कि उन्हें डर है कि उनके एजेंट्स बेकाबू हो सकते हैं। इस चेतावनी को कोई भी देश हलके में नहीं ले सकता। क्या हम कोई हादसा होने के बाद जागेंगे या पहले से कदम उठाएंगे। उन्होंने नीतियां बनाने वालों से अपील की है कि ऐसे नियम बनें जो सुरक्षा भी दें और इनोवेशन को भी न रोकें। मस्क ने स्टारलिंक की लॉन्चिंग में देरी के लिए अंबानी को जिम्मेदारी बताया इलॉन मस्क भारत में स्टारलिंक की लॉन्चिंग में हो रही देरी को लेकर पिछले कुछ दिनों से नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। इस देरी के लिए वो रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी को जिम्मेदारी बता रहे हैं और उनके खिलाफ लगातार सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं। हाल ही में मस्क ने अपने एक पोस्ट में मुकेश अंबानी पर तंज कसते हुए उन्हें ‘प्राइम मिनिस्टर अंबानी’ लिखा था। इस पोस्ट में उन्होंने अंबानी को भारत का रियल बॉस बताया था। उनका तर्क था कि स्टारलिंक भारत के बिना इंटरनेट वाले इलाकों में कनेक्टिविटी पहुंचा सकता है। इससे दूरदराज के वंचित बच्चों को शिक्षा और छोटे कारोबारियों को ग्लोबल मार्केट तक पहुंच मिलेगी। सरकार का जवाब- भारत में मोनोपॉली की इजाजत नहीं मिलेगी ‘इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026’ में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सरकार का रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि भारत में किसी भी सेक्टर में मोनोपॉली की इजाजत नहीं दी जाएगी। उन्होंने बताया कि देश में तीन सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियों को लाइसेंस मिल चुके हैं। 1. रिलायंस जियो सैटकॉम 2. भारती एयरटेल सपोर्टेड यूटेलसेट वनवेब 3. इलॉन मस्क की स्टारलिंक हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि लाइसेंस पाने वाली इन सभी कंपनियों की सिक्योरिटी क्लीयरेंस अभी बाकी है। इसके अलावा सैटेलाइट स्पेक्ट्रम का प्राइसिंग फ्रेमवर्क भी तय किया जा रहा है। सभी जरूरी शर्तें पूरी होने के बाद ही भारत में ये सेवाएं शुरू हो सकेंगी। स्टारलिंक को जून 2025 में मिली थी मंजूरी रॉयटर्स के अनुसार, इलॉन मस्क की स्टारलिंक 2022 से कॉमर्शियल लाइसेंस का इंतजार कर रही थी। जून 2025 में कंपनी को भारत के टेलीकॉम मिनिस्ट्री से लॉन्च की मंजूरी मिली थी। इसके अगले महीने यानी जुलाई 2025 में इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर (IN-SPACe) ने स्टारलिंक को 5 साल के कॉमर्शियल ऑपरेशंस का लाइसेंस जारी किया। हालांकि, कंपनी को अभी भी कुछ मंजूरियां मिलना बाकी है। लो अर्थ ऑर्बिट में मौजूद सैटेलाइट से इंटरनेट देती है स्टारलिंक स्टारलिंक किट में स्टारलिंक डिश, एक वाई-फाई राउटर, पॉवर सप्लाई केबल्स और माउंटिंग ट्राइपॉड होता है। हाई-स्पीड इंटरनेट के लिए डिश को खुले आसमान के नीचे रखते हैं। iOS और एंड्रॉइड पर स्टारलिंक का एप मौजूद है, जो सेटअप से लेकर मॉनिटरिंग करता है। स्टारलिंक लो अर्थ ऑर्बिट में अपने सैटेलाइट को तैनात कर इंटरनेट सर्विस देती है। इसके जरिए उन दूर-दराज के इलाकों में भी इंटरनेट मिलता है, जहां मोबाइल नेटवर्क या ब्रॉडबैंड नहीं है। कंपनी 2021 से ही भारत में अपनी सेवाएं शुरू करने की कोशिश कर रही है। IN-SPACe क्या है? इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर (IN-SPACe) भारत सरकार की एक नोडल एजेंसी है। यह भारत में प्राइवेट कंपनियों को अंतरिक्ष से जुड़ी गतिविधियों और कॉमर्शियल सैटेलाइट सर्विसेज संचालित करने के लिए मंजूरी देती है। सैटेलाइट इंटरनेट का क्या फायदा है? आम तौर पर इंटरनेट फाइबर केबल या मोबाइल टावरों के जरिए पहुंचता है। वहीं सैटेलाइट इंटरनेट सीधे अंतरिक्ष में तैनात सैटेलाइट्स के जरिए ग्राउंड स्टेशन और यूजर तक सिग्नल भेजता है। इससे पहाड़ों, जंगलों और दूरदराज के इलाकों में भी आसानी से हाई-स्पीड कनेक्टिविटी मिल जाती है। ये खबर भी पढ़ें… मस्क बोले- भारत में स्टारलिंक के सस्ते प्लान लाएंगे: मुकाबले से अंबानी का मुनाफा घटेगा, लेकिन कारोबार बंद नहीं होगा सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस ‘स्टारलिंक’ की कीमतें भारत में काफी सस्ती होंगी। देश में इसकी एंट्री को लेकर चल रहे विवाद के बीच इलॉन मस्क ने इसके संकेत दिए हैं। उनका कहना है कि मार्केट में कंपनियों के बीच कॉम्पिटिशन बढ़ने से आखिरी फायदा भारतीय यूजर्स को ही होगा। उन्होंने कहा कि स्टारलिंक के आने से अंबानी का मुनाफा थोड़ा घट सकता है, लेकिन उनका कारोबार बंद नहीं होगा। जाहिर है, अगर स्टारलिंक भारत में बहुत महंगी होगी तो उसे कोई नहीं खरीदेगा। इसलिए स्पेसएक्स को यहां टिकने के लिए अपनी कीमतें सस्ती रखनी ही पड़ेंगी। पूरी खबर पढ़ें…
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