एक्सीडेंट में खोए दोनों पैर, व्हीलचेयर पर रचा इतिहास:लुधियाना के शुभम ने टेबल टेनिस में जीता गोल्ड; बोले-3 साल बिस्तर पर रहे

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# शुभम बधवा: एक प्रेरणादायक कहानी जो सीमाओं को पार करती है

मुख्य बिंदु

# शुभम बधवा: एक प्रेरणादायक कहानी जो सीमाओं को पार करती है

## लुधियाना के शुभम बधवा की अद्भुत यात्रा

विस्तृत जानकारी

लुधियाना के शुभम बधवा ने एक सड़क हादसे में अपने दोनों पैर खोने के बावजूद अपने सपनों को कभी नहीं छोड़ा। यह कहानी न केवल साहस की है, बल्कि यह एक प्रेरणा भी है कि कैसे एक व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है। शुभम ने हाल ही में मिस्र में आयोजित ITTF वर्ल्ड पैरा टेबल टेनिस चैलेंजर में सिल्वर मेडल जीतकर अपने नाम के साथ एक नया अध्याय जोड़ा है। इसके बाद, उन्होंने 2 से 4 दिसंबर 2025 तक वडोदरा, गुजरात में आयोजित UTT दूसरी नेशनल रैंकिंग टेबल टेनिस चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल भी जीता।

## दुर्घटना से पहले का जीवन

शुभम का सफर 2016 में एक सड़क दुर्घटना के साथ शुरू हुआ, जब उन्होंने अपने पैरों को खो दिया। उस समय, वह जिम्नास्टिक में सक्रिय थे और विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग ले चुके थे। उनका सपना था कि वह जिम्नास्टिक में देश का प्रतिनिधित्व करें, लेकिन इस हादसे ने उनकी राह को पूरी तरह से बदल दिया। व्हीलचेयर पर आने के बावजूद, शुभम ने हार नहीं मानी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करने का संकल्प लिया।

यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है

## परिवार का समर्थन

29 वर्षीय शुभम बधवा लुधियाना के शाम नगर क्षेत्र के निवासी हैं। उन्होंने LPU से B.Tech की डिग्री हासिल की है और पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहे हैं। उनके पिता एक रिसॉर्ट के मैनेजर हैं और मां एक हाउस वाइफ हैं। बचपन से ही शुभम खेलों के प्रति उत्साही रहे हैं। 6वीं कक्षा से जिम्नास्टिक में रुचि रखने वाले शुभम ने 12वीं के बाद मॉडलिंग में भी कदम रखा था। उनका फिटनेस के प्रति जुनून ऐसा था कि वह प्रतिदिन जिम जाते थे।

## एक दर्दनाक मोड़

22 फरवरी 2016 की रात, शुभम की जिंदगी में एक बड़ा मोड़ आया। जब वह जिम से लौट रहे थे, अचानक एक कुत्ता उनके सामने आ गया। शुभम ने उस कुत्ते को बचाने के लिए बाइक मोड़ी, लेकिन उनका संतुलन बिगड़ गया और वह गंभीर दुर्घटना का शिकार हो गए। अस्पताल में डॉक्टर्स ने उन्हें बताया कि उन्हें पैरालिसिस हो गया है और उन्हें जिंदगीभर व्हीलचेयर पर रहना होगा।

## कठिनाइयों का सामना

इस हादसे के बाद, शुभम के लिए तीन साल बेहद कठिन रहे। बिस्तर पर रहने के दौरान, उन्होंने हार नहीं मानी। उनके दोस्तों ने उन्हें पैरा खेलों की संभावनाओं के बारे में बताया, और शुभम ने टेबल टेनिस की कोचिंग लेना शुरू किया। शुरू में सब कुछ मुश्किल था, लेकिन धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाई।

## एशियन गेम्स का सपना

अब शुभम का सपना एशियन गेम्स में भाग लेना और पैरालंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करना है। उन्होंने कहा कि वह हर दिन 6-7 घंटे की प्रैक्टिस कर रहे हैं और उनकी डाइट का खास ध्यान रख रहे हैं। शुभम का मानना है कि पैरालंपिक में मेडल जीतना आसान नहीं होगा, लेकिन उन्हें अपने हौसले पर पूरा भरोसा है।

## प्रेरणा का स्रोत

शुभम की सफलता के पीछे उनके परिवार का अटूट समर्थन है। जब वह बिस्तर पर थे, तब उनकी मां ने उन्हें कभी अकेला महसूस नहीं होने दिया। पिता ने हर जरूरत का ध्यान रखा और बड़े भाई ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया। शुभम का कहना है कि अगर उनके परिवार का समर्थन न होता, तो वह आज इस मुकाम पर नहीं होते।

## युवाओं के लिए प्रेरणादायक संदेश

युवाओं को शुभम का संदेश है, “कभी हार मत मानो।” उन्होंने कहा कि जीवन में मुश्किलें आएंगी, लेकिन खुद पर भरोसा रखना जरूरी है। शुभम का मानना है कि अगर वह व्हीलचेयर पर बैठकर देश का नाम रोशन कर सकते हैं, तो दूसरों के लिए भी कुछ भी संभव है।

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शुभम बधवा की कहानी हमें यह सिखाती है कि जीवन में कठिनाइयों का सामना करते हुए भी हम अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं। उनकी प्रेरणा और साहस से हम सभी को यह सीखने को मिलता है कि कभी हार नहीं माननी चाहिए। शुभम का सफर एक उज्ज्वल उदाहरण है कि कैसे एक व्यक्ति अपने जुनून और मेहनत से बड़ी से बड़ी बाधाओं को पार कर सकता है।

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