जेन-जी ने बदला खरीदारी का ट्रेंड:कंपनियों को प्रोडक्ट के साथ कोई कहानी, लाइफस्टाइल पेश करना पड़ रहा

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देश का कंज्यूमर मार्केट बदल रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह जेन-जी (1997-2012 के बीच जन्मे) ग्राहकों का बदलती शॉपिंग हैबिट है। यह पीढ़ी खरीदारी को सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि अपनी पहचान और पर्सनैलिटी से जोड़कर देख रही है। आरपी-संजीव गोयनका समूह के वाइस चेयरमैन शाश्वत गोयनका का कहना है कि कंपनियां पहले के कंज्यूमर के हिसाब से रणनीति बना रही हैं, जबकि असल बाजार पूरी तरह बदल चुका है। गोयनका के मुताबिक, पहले जहां लोग घर, कार या सोना जैसी चीजें जुटाकर अपना स्टेटस और सफलता दिखाते थे, वहीं जेन-जी खुद को बेहतर बनाने में निवेश कर रही है। उनका फोकस बाहरी संपत्ति की जगह ‘इंटरनल पोर्टफोलियो’ पर है। इसमें फिटनेस, पर्सनल केयर और ट्रैवल शामिल हैं। यही वजह है कि फिटनेस, ब्यूटी, डाइनिंग और एंटरटेनमेंट जैसे सेक्टर्स तेजी से बढ़ रहे हैं। खास बात ये है कि जेन जी खर्च करने से पीछे नहीं हट रही और अब तक की सबसे आक्रामक उपभोक्ता पीढ़ी बनकर उभर रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया ने इस बदलाव को और तेज किया है। इससे युवा ज्यादा जागरूक, प्रयोगशील और ब्रांड के प्रति सजग हो गए हैं। इस बदलती सोच का सीधा असर कंपनियों की रणनीति पर पड़ रहा है। अब केवल प्रोडक्ट की उपयोगिता या कीमत ही नहीं, बल्कि उससे मिलने वाला अनुभव और उससे जुड़ी पहचान ज्यादा अहम हो गई है। गोयनका मानते हैं कि अब कंपनियों को प्रोडक्ट के साथ कोई कहानी, मोटिव और लाइफस्टाइल पेश करनी पड़ रही है। जो ब्रांड इस बदलाव को समझ पा रहे हैं, वही तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जबकि पारंपरिक सोच पर टिके ब्रांड पीछे छूट रहे हैं। भारत में करीब 65% लोग 35 साल से कम उम्र के हैं। इसलिए यह बदलाव लंबे समय तक चलने वाला है। इससे खर्च बढ़ेगा और बाजार के पास मौका होगा, लेकिन अब ग्रोथ जेन-जी के ट्रेंड्स और उनके बिहेवियर के हिसाब से होगी। 2035 तक भारतीय उपभोक्ता बाजार में हर दूसरी शॉपिंग जेन-जी करेगी समय के साथ इस ट्रेंड का असर और गहरा होने वाला है। गोयंका कहते हैं कि 2035 तक जेन-जी देश के कंजम्प्शन में करीब 185 लाख करोड़ का योगदान दे सकती है। यानी हर दूसरी खरीद यही पीढ़ी करेगी। कंपनियों के सामने यह चुनौती कम होगी कि वे क्या बेच रही हैं, बल्कि यह होगी वे कंज्यूमर को क्या बनने में मदद कर रही हैं।

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