क्या कश्मीर में सेना के काफिले पर हुआ पथराव:1 साल पुराना PoK का वीडियो गलत दावे के साथ वायरल

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# वायरल वीडियो का सच: पाकिस्तानी रेंजर्स पर स्थानीय लोगों का पथराव

मुख्य बिंदु

# वायरल वीडियो का सच: पाकिस्तानी रेंजर्स पर स्थानीय लोगों का पथराव

सोशल मीडिया पर कई बार ऐसे वीडियो वायरल होते हैं जो अक्सर गलत जानकारी फैलाते हैं। हाल ही में एक ऐसा ही वीडियो तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें पहाड़ी क्षेत्र से गुजर रहे एक वाहन काफिले पर स्थानीय लोगों द्वारा पत्थर फेंकने की घटना दिखाई दे रही है। इस वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि यह कश्मीर का है, जहां सेना के काफिले पर लोगों ने हमला किया।

विस्तृत जानकारी

## वीडियो की वास्तविकता

हालांकि, इस वायरल वीडियो की सच्चाई कुछ और ही है। यह वीडियो वास्तव में मई 2024 का है और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) का है। वीडियो में दिख रहा है कि स्थानीय लोग पाकिस्तानी रेंजर्स के काफिले पर पथराव कर रहे हैं। यह वीडियो पाकिस्तानी मीडिया प्लेटफार्म जिओ न्यूज ने 18 मई 2024 को अपने यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया था।

## प्रदर्शन का कारण

यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है

मई 2024 में PoK में स्थानीय लोगों ने पाकिस्तान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने बढ़ती महंगाई, बिजली और आटे की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि के खिलाफ आवाज उठाई। इस दौरान, शोरन दा नक्का गांव के पास पाकिस्तानी सेना के काफिले पर पत्थर फेंके गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पाकिस्तानी सेना ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया और फायरिंग भी की।

## मीडिया रिपोर्ट्स

इस घटना की रिपोर्टिंग डॉन न्यूज ने 14 मई 2024 को अपनी वेबसाइट पर की थी। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया था कि स्थानीय लोगों का यह प्रदर्शन पाकिस्तान सरकार की नीतियों के खिलाफ है। इसके अलावा, भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने भी इस वीडियो को फर्जी करार दिया है। PIB ने स्पष्ट किया कि यह वीडियो पुराना है और मुजफ्फराबाद का है, जिससे यह साबित होता है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा दावा पूरी तरह गलत है।

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इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि यह एक साल पुराना वीडियो है, जो कश्मीर का नहीं बल्कि PoK का है। सोशल मीडिया पर फैली गलत जानकारी को ध्यान में रखते हुए, यह आवश्यक है कि लोग किसी भी वीडियो या समाचार के बारे में सही जानकारी की पुष्टि करें।

इस वीडियो के वायरल होने से यह भी समझ में आता है कि कैसे गलत सूचनाएं फैलती हैं और लोगों को भ्रामक जानकारी दी जाती है। लोगों को चाहिए कि वे ऐसे वीडियो पर तुरंत विश्वास न करें और तथ्यों की जांच करें।

इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थानीय लोग अपनी समस्याओं को लेकर कितने चिंतित हैं और वे अपनी आवाज उठाने के लिए किस हद तक जा सकते हैं।

इस वीडियो की सच्चाई को जानने के बाद, यह सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि हम सोशल मीडिया पर साझा की जा रही जानकारी की सत्यता की जांच करें, ताकि हम असत्य और भ्रामक सूचनाओं से बच सकें।

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