निवेशकों की बजट 2026 से 3 बड़ी उम्मीदें:₹2 लाख तक का मुनाफा हो सकता है टैक्स फ्री; ट्रांजेक्शन टैक्स और STCG घटाने का सुझाव

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# केंद्रीय बजट 2026 से पहले निवेशकों की मांगें: शेयर बाजार पर प्रभाव

मुख्य बिंदु

# केंद्रीय बजट 2026 से पहले निवेशकों की मांगें: शेयर बाजार पर प्रभाव

## निवेशकों की मांगें और शेयर बाजार की स्थिति

विस्तृत जानकारी

केंद्रीय बजट 2026 से पहले, शेयर बाजार के निवेशकों और विशेषज्ञों ने सरकार के सामने अपनी मांगों की एक लिस्ट प्रस्तुत की है। इन मांगों का मुख्य उद्देश्य रिटेल निवेशकों को प्रोत्साहित करना है। बाजार के जानकारों का मानना है कि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) पर मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। वर्तमान में, साल भर में 1.25 लाख रुपए तक के मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं लगता, जिसे बढ़ाकर 2 लाख रुपए करने का सुझाव दिया गया है।

## टैक्स छूट सीमा में वृद्धि की आवश्यकता

### LTCG और मिडिल क्लास निवेशक

यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है

विशेषज्ञों का सुझाव है कि LTCG छूट सीमा को बढ़ाकर कम से कम 2 लाख रुपए किया जाना चाहिए। यह कदम मिडिल क्लास निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो पर बेहतर रिटर्न प्राप्त करने में मदद करेगा और उन्हें लंबी अवधि के लिए निवेश करने के लिए प्रेरित करेगा। पिछले कुछ वर्षों में, शेयर बाजार में रिटेल निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ी है, इसलिए मौजूदा 1.25 लाख रुपए की LTCG छूट सीमा काफी कम है।

### STT और STCG की चिंता

इसके अलावा, निवेशक सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) की ऊंची दरों को लेकर भी चिंतित हैं। बाजार का मानना है कि ट्रांजैक्शन पर लगने वाले टैक्स को कम करने से लिक्विडिटी बढ़ेगी और अधिक लोग शेयर बाजार से जुड़ सकेंगे। पिछले बजट में फ्यूचर्स और ऑप्शंस (FO) पर STT की दरें बढ़ा दी गई थीं, जिससे ब्रोकरेज हाउस और ट्रेडर्स का कहना है कि ट्रांजैक्शन टैक्स के अधिक होने के कारण ट्रेडिंग की लागत बढ़ गई है, जिसका सीधा असर बाजार के वॉल्यूम पर पड़ रहा है।

## कैश मार्केट में STT की दरों में कमी

निवेशकों की मांग है कि कैश मार्केट में होने वाली खरीदारी पर STT की दरें कम रखी जाएं। इससे सट्टेबाजी के बजाय वास्तविक निवेश को बढ़ावा मिलेगा। विभिन्न एसेट क्लास जैसे कि इक्विटी, डेट, गोल्ड, और रियल एस्टेट के लिए ‘लॉन्ग टर्म’ की परिभाषा अलग-अलग है। बजट 2026 में उम्मीद की जा रही है कि सरकार इसे सरल बनाने के लिए सभी एसेट्स के लिए 12 महीने का एक समान होल्डिंग पीरियड तय कर सकती है। इससे टैक्स कैलकुलेशन आसान हो जाएगा।

## रियल एस्टेट और गोल्ड पर इंडेक्सेशन बेनिफिट

रियल एस्टेट और गोल्ड जैसे एसेट्स पर से इंडेक्सेशन बेनिफिट हटने के बाद से निवेशकों में नाराजगी है। मार्केट एक्सपर्ट्स चाहते हैं कि सरकार कम से कम गैर-वित्तीय एसेट्स पर इंडेक्सेशन का लाभ फिर से शुरू करे। इसके अलावा, टैक्स की दर को 12.5% से घटाकर 10% करने की भी मांग की जा रही है, ताकि लंबी अवधि के निवेशकों को महंगाई के अनुपात में राहत मिल सके।

## घरेलू निवेशकों की भूमिका

टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि सरकार कैपिटल गेन टैक्स के ढांचे को उदार बनाती है, तो इससे घरेलू बचत का प्रवाह शेयर बाजार की ओर बढ़ेगा। विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच, घरेलू निवेशकों का पैसा बाजार को मजबूती दे सकता है।

## सरकार के लिए चुनौती

सरकार के लिए चुनौती यह होगी कि वह राजस्व और निवेशकों की उम्मीदों के बीच संतुलन बनाए। निवेशकों की मांगों को ध्यान में रखते हुए, सरकार को ऐसे कदम उठाने होंगे जो बाजार की स्थिरता और विकास को बढ़ावा दें।

## विशेष ट्रेडिंग सेशन की जानकारी

शेयर बाजार में विशेष ट्रेडिंग सेशन का आयोजन 1 फरवरी को किया जाएगा। यह दिन रविवार होने के बावजूद, शेयर बाजार सामान्य दिनों की तरह खुलेगा। BSE और NSE ने इस विशेष ट्रेडिंग सेशन की जानकारी दी है, ताकि निवेशक और ट्रेडर्स बजट के दिन बाजार की प्रतिक्रिया देख सकें।

इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए, यह स्पष्ट है कि बजट 2026 में निवेशकों की मांगों को पूरा करना महत्वपूर्ण होगा। इससे न केवल रिटेल निवेशकों को लाभ होगा, बल्कि शेयर बाजार की समग्र स्थिति भी मजबूत होगी।

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