# सीतापुर में पुलिस की कार्रवाई पर किसानों का विरोध: जानकीनगर घटना की पूरी जानकारी
मुख्य बिंदु
# सीतापुर में पुलिस की कार्रवाई पर किसानों का विरोध: जानकीनगर घटना की पूरी जानकारी
## सीतापुर में पथराव की घटना
विस्तृत जानकारी
सीतापुर के अटरिया थाना क्षेत्र में हाल ही में पुलिस के पीआरवी वाहन पर पथराव की एक घटना ने किसान और सामाजिक संगठनों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है। यह घटना जानकीनगर गांव में हुई, जहां पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया। इसके बाद स्थानीय समुदाय में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया।
## प्रदर्शनकारियों की नाराजगी
किसान, सामाजिक संगठन के सदस्य और ग्रामीण बड़ी संख्या में अटरिया थाने पहुंचे और थाने का घेराव करते हुए नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई को संदिग्ध और एकतरफा बताते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी। उनका आरोप है कि पुलिस ने एक आरोपी पर गलत तरीके से अवैध असलहे का आरोप लगाते हुए आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई की, जबकि उसके पास से कोई अवैध हथियार बरामद नहीं हुआ।
यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है
## तनावपूर्ण माहौल
प्रदर्शन के दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। प्रदर्शनकारियों ने निष्पक्ष जांच की मांग की और कहा कि निर्दोष लोगों को झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले की सही तरीके से जांच नहीं की गई, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे। ऐसे में यह स्पष्ट हो गया कि स्थानीय समुदाय में पुलिस की कार्रवाई के प्रति असंतोष गहरा है।
## अधिकारियों की प्रतिक्रिया
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सिधौली क्षेत्राधिकारी कपूर कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया। सीओ कपूर कुमार ने कहा कि कानून के दायरे में रहकर मामले की जांच की जाएगी, और यदि किसी के साथ अन्याय हुआ है, तो उचित कार्रवाई की जाएगी।
## प्रदर्शन समाप्त, लेकिन चेतावनी जारी
सीओ के आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारियों ने अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दिया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में पारदर्शिता नहीं बरती गई, तो वे दोबारा आंदोलन करेंगे। इस दौरान मौके पर भाजपा कार्यकर्ता, विभिन्न किसान संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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यह घटना सीतापुर में पुलिस और स्थानीय समुदाय के बीच बढ़ते तनाव का एक उदाहरण है। किसानों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और निर्दोष लोगों को न्याय मिले। यदि पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई में कोई भी अनियमितता पाई जाती है, तो यह स्थानीय प्रशासन के लिए एक चुनौती होगी।
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्थानीय समुदाय अपनी आवाज उठाने के लिए तैयार है और वे अपने अधिकारों के लिए लड़ने का संकल्प रख रहे हैं। आगे देखना होगा कि क्या प्रशासन इस मामले में उचित और पारदर्शी कार्रवाई करता है या नहीं।
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