# निरंजना (फल्गु) नदी के पुनर्जीवन की दिशा में ठोस कदम
मुख्य बिंदु
# निरंजना (फल्गु) नदी के पुनर्जीवन की दिशा में ठोस कदम
## मगध की जीवनरेखा: निरंजना नदी
विस्तृत जानकारी
गयाजी: निरंजना (फल्गु) नदी, जिसे मगध क्षेत्र की जीवनरेखा माना जाता है, के पुनर्जीवित करने की दिशा में अब ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। यह नदी न केवल स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का भी अभिन्न हिस्सा है। हाल ही में, बिहार लोक प्रशासन व ग्रामीण विकास संस्थान (बिपार्ड) गया के 123 कनिष्ठ अभियंताओं ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है।
## पदयात्रा का उद्देश्य
इन अभियंताओं ने गया से झारखंड के चतरा जिले के हंटरगंज तक निरंजना नदी के किनारे एक लंबी पदयात्रा की। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य नदी को निर्मल और अविरल बनाने का संकल्प लेना था। बिपार्ड और नमामि निरंजना फल्गु मिशन के सहयोग से आयोजित इस सफाई अभियान में अभियंताओं ने नदी के तट पर सफाई की और स्थानीय निवासियों के साथ संवाद कर जल संरक्षण के महत्व को साझा किया।
यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है
## जल संकट की चिंता
अभियंताओं ने नदी के सूखते अस्तित्व और घटते जलस्तर पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उनका मानना है कि यदि अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ी को फल्गु नदी केवल किताबों में पढ़ने को मिलेगी। यह स्थिति न केवल स्थानीय निवासियों के लिए, बल्कि सम्पूर्ण पर्यावरण के लिए भी चिंताजनक है।
## पुनर्जीवित करने के प्रयास
निरंजना नदी को पुनर्जीवित करने के लिए 22 अगस्त 2021 को निरंजना रिवर रिचार्ज मिशन की शुरुआत की गई थी। इसके बाद, 20 फरवरी 2024 को भारत सरकार के जलशक्ति मंत्रालय ने नमामि निरंजना फल्गु मिशन शुरू कर इस प्रयास को नई ताकत दी। इस मिशन का उद्देश्य नदी के जलस्तर को बढ़ाना और उसके पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्स्थापित करना है।
## कार्यक्रम का आयोजन
बिपार्ड गया के एडिशनल डायरेक्टर जनरल और मगध प्रमंडल की आयुक्त डॉ. सफीना ए. एन. के मार्गदर्शन में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बिपार्ड के सीनियर असिस्टेंट डायरेक्टर संतोष कुमार सिंह और उनकी टीम ने इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में, अभियंताओं ने न केवल सफाई का कार्य किया, बल्कि जागरूकता फैलाने में भी योगदान दिया।
## जन सहयोग की आवश्यकता
इस अवसर पर नमामि निरंजना फल्गु मिशन के संयोजक संजय सज्जन सिंह ने कहा कि नदी को बचाने की यह लड़ाई केवल सरकार की नहीं, बल्कि जन सहयोग की भी आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि नदी के बेसिन क्षेत्र में जल चेतना विकसित की जाएगी, कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा, और टूटे हुए जल स्रोतों को पुनर्जीवित किया जाएगा। इस तरह, महान निरंजना फल्गु को नई जिंदगी देने का प्रयास किया जाएगा।
## सामूहिक संदेश
कार्यक्रम में मिशन के अन्य सदस्यों ने भी भाग लिया और सभी ने एक ही संदेश दिया कि “निरंजना बचेगी, तभी गयाजी बचेगा।” यह संदेश न केवल स्थानीय लोगों के लिए, बल्कि सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
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निरंजना (फल्गु) नदी के पुनर्जीवित करने के प्रयास में स्थानीय समुदाय और सरकारी संस्थाओं का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। यदि हम सभी मिलकर इस दिशा में काम करें, तो हम इस अनमोल जल स्रोत को बचा सकते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सुरक्षित रख सकते हैं। यह केवल नदी की सुरक्षा नहीं, बल्कि हमारे पर्यावरण और सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा का भी प्रश्न है।
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