पोषक अनाज के उत्पादन में मप्र तीसरे स्थान पर‎:मोटे अनाज की ओर लौट रहा प्रदेश का किसान, देश में 12.17 फीसदी है हिस्सेदारी‎

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मध्यप्रदेश में धीरे धीरे ही सही, पर खेती‎ एक बार फिर परंपरागत मोटे (पोषक)‎अनाज की ओर लौट रही है। कम पानी,‎ कम लागत और जलवायु अनुकूलता ने ‎‎किसानों का भरोसा मजबूत किया है। इसी‎ का असर है कि 2024–25 में प्रदेश ने ‎‎77.75 लाख टन मोटे अनाज का उत्पादन ‎‎किया। यह उत्पादन दो साल पहले की ‎तुलना में 18.62 लाख टन ज्यादा है। ‎‎2022–23 में उत्पादन 59.13 लाख टन ‎‎और 2023–24 में 56.74 लाख टन रहा ‎था। तेजी से बढ़ते उत्पादन के साथ‎ मध्यप्रदेश देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया ‎है। मोटे अनाज उत्पादन में कर्नाटक पहले‎ और राजस्थान दूसरे स्थान पर हैं। देश के‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎ कुल मोटे अनाज उत्पादन में मध्यप्रदेश की ‎हिस्सेदारी 12.17 प्रतिशत है। प्रदेश के 52‎जिलों में ज्वार, 48 में मक्का और 44 जिलों ‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎में बाजरे की खेती हो रही है। कोदो-कुटकी‎जैसी पारंपरिक फसलें भी 27 जिलों में फिर‎से जमीन पकड़ रही हैं।‎ इन वजहों से प्रदेश में धीरे-धीरे बढ़ रहा उत्पादन‎ मोटे अनाज को सरकार ने पोषक‎ अनाज के रूप में आगे बढ़ाया है। ‎समर्थन मूल्य, बोनस और बीज‎ सहायता जैसी योजनाओं से किसानों को‎ इसकी खेती का भरोसा मिला। जलवायु‎ संकट और अनिश्चित बारिश के दौर में कम पानी और कम लागत वाली ये‎ फसलें किसानों के लिए ज्यादा सुरक्षित ‎साबित हो रही हैं, इसलिए गेहूं-धान की‎ जगह बाजरा-ज्वार की ओर रुझान बढ़ा ‎है। घरेलू थाली में भले ही इनकी खपत ‎सीमित हो, लेकिन निर्यात, रेडी-टू-ईट‎ उत्पाद, स्वास्थ्य आधारित खाद्य सामग्री‎ और आटा मिश्रण उद्योग में मांग‎ लगातार बढ़ रही है। कुछ राज्यों में‎सार्वजनिक वितरण प्रणाली, आंगनवाड़ी ‎और मध्यान्ह भोजन में मोटे अनाज को‎ जगह मिली है, जिससे उत्पादन को ‎स्थिर सहारा मिला। शहरी इलाकों में‎स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है,‎ लेकिन यह रुझान अभी आम जनसंख्या ‎तक नहीं पहुंच पाया है।‎ ज्वार में भिंड-बुरहानुपर तो मक्का में बैतूल, गुना‎ में अधिक पैदावार सरकारी आंकड़ों के अनुसार‎ 2022–23 में ज्वार उत्पादन में भिंड और बुरहानपुर आगे रहे। भिंड में 25,411 टन‎ और बुरहानपुर में 6,364 टन ज्वार का‎ उत्पादन दर्ज किया गया। इसके अलावा‎ छतरपुर में 4,739 टन, दतिया में 4,571 टन, ‎खरगोन में 4,175 टन और विदिशा में ‎2,785 टन ज्वार पैदा हुआ। मक्का उत्पादन‎ में बैतूल प्रदेश में सबसे आगे रहा, जहां 5.84 ‎लाख टन पैदावार हुई। गुना में 2.40 लाख ‎टन मक्का उत्पादन दर्ज किया गया। इसके‎ बाद बड़वानी में 2.19 लाख, धार में 1.65‎लाख, राजगढ़ में 1.11 लाख और नर्मदापुरम‎ में 91 हजार टन मक्का हुआ। सागर में‎ 79,803 टन और खंडवा में 71,093 टन‎ मक्का उत्पादन दर्ज किया गया।‎

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