सब्जियों-दालों के दाम बढ़ने से दिसंबर में महंगाई बढ़ी:3 महीने में सबसे ज्यादा, 1.33% पर पहुंची, नवंबर में 0.71% थी

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# दिसंबर में रिटेल महंगाई में वृद्धि: 1.33% पर पहुंची दर

मुख्य बिंदु

# दिसंबर में रिटेल महंगाई में वृद्धि: 1.33% पर पहुंची दर

## रिटेल महंगाई का हाल

विस्तृत जानकारी

दिसंबर 2023 में भारत में रिटेल महंगाई दर पिछले महीने की तुलना में बढ़कर 1.33% पर पहुंच गई है। यह दर पिछले तीन महीनों का उच्चतम स्तर है। नवंबर में यह दर 0.71% पर थी, जो कि पिछले 14 वर्षों में सबसे कम स्तर था। अक्टूबर में रिटेल महंगाई 0.25% पर पहुंच गई थी, जो एक रिकॉर्ड निचला स्तर था।

## महंगाई में वृद्धि के कारण

दिसंबर में महंगाई में वृद्धि मुख्य रूप से दाल, सब्जियों, मांस, मछली, अंडे और बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण हुई है। यह आंकड़े भारत सरकार ने 12 जनवरी 2024 को जारी किए। इस वृद्धि ने उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बना दिया है, क्योंकि खाद्य सामग्री की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रही है।

यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है

### खाद्य सामग्री की कीमतों में बदलाव

नवंबर में खाद्य सामग्री की कीमतों में वृद्धि देखी गई, जबकि अक्टूबर में यह 14 साल के निचले स्तर पर थी। अक्टूबर में रिटेल महंगाई 0.25% के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई थी, जिसका मुख्य कारण खाने-पीने की चीजों की कीमतों में कमी थी। इससे पहले सितंबर में यह दर 1.44% पर थी।

## उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की जानकारी

भारत में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की मौजूदा श्रृंखला 2012 के बेस ईयर पर आधारित है। इसका मतलब है कि 2012 की कीमतों को 100 मानकर तुलना की जाती है। समय के साथ आंकड़ों को अद्यतन किया जाता है ताकि वे सही बने रहें। CPI श्रृंखला महंगाई को मापने का एक सरल तरीका है, जो रोजमर्रा की चीजों जैसे दूध, सब्जी, और पेट्रोल की कीमतों में बदलाव को दर्शाता है।

### CPI का महत्व

उदाहरण के लिए, यदि 2020 बेस ईयर है और उस वर्ष एक किलो टमाटर की कीमत ₹50 थी, तो 2025 में यदि उसकी कीमत ₹80 हो जाती है, तो महंगाई 60% बढ़ी है। यही फॉर्मूला CPI में लागू होता है, लेकिन यह पूरे बाजार में विभिन्न उत्पादों पर लागू होता है।

## महंगाई के कारण और प्रभाव

महंगाई के बढ़ने या घटने की प्रक्रिया उत्पाद की मांग और आपूर्ति पर निर्भर करती है। यदि लोगों के पास अधिक पैसे हैं, तो वे अधिक चीजें खरीदेंगे, जिससे मांग बढ़ेगी। यदि मांग के अनुसार आपूर्ति नहीं होती है, तो कीमतें बढ़ेंगी।

### मांग और आपूर्ति का संतुलन

दूसरी ओर, यदि मांग कम है और आपूर्ति अधिक है, तो महंगाई कम होगी। इस प्रकार, महंगाई दर का निर्धारण विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है, जिसमें वैश्विक बाजार की स्थिति, उत्पादन लागत, और उपभोक्ता की खरीदारी की प्रवृत्ति शामिल हैं।

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दिसंबर में रिटेल महंगाई में आई वृद्धि ने एक बार फिर से उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बना दिया है। खाद्य सामग्री और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम आदमी की जीवनशैली पर असर डाला है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाती है और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए क्या उपाय करती है।

महंगाई की स्थिति पर नजर रखना आवश्यक है, ताकि उपभोक्ता सही निर्णय ले सकें और अपने बजट को संतुलित रख सकें।

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