थोक महंगाई 8 महीने में सबसे ज्यादा:दिसंबर में खाने-पीने की चीजें महंगी होने से 0.83% पर पहुंची, नवंबर में माइनस 0.32% पर थी

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# थोक महंगाई (WPI) में वृद्धि: दिसंबर में 0.83% पर पहुंचा

मुख्य बिंदु

# थोक महंगाई (WPI) में वृद्धि: दिसंबर में 0.83% पर पहुंचा

दिसंबर 2023 में थोक महंगाई (WPI) 0.83% पर पहुंच गई है, जो कि पिछले आठ महीनों का उच्चतम स्तर है। यह वृद्धि मुख्यतः खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण हुई है। नवंबर में यह दर -0.32% थी, जबकि अक्टूबर में यह -1.21% तक गिर गई थी। वाणिज्य मंत्रालय ने 14 दिसंबर को थोक महंगाई के नवीनतम आंकड़े जारी किए हैं, जो कि देश की आर्थिक स्थिति के लिए महत्वपूर्ण संकेतक हैं।

विस्तृत जानकारी

## थोक महंगाई के प्रमुख घटक

थोक महंगाई में वृद्धि का मुख्य कारण आवश्यक वस्तुओं और खाद्य पदार्थों की कीमतों में इजाफा है। थोक महंगाई के तीन प्रमुख घटक हैं:

– **प्राइमरी आर्टिकल्स**: 22.62% का वेटेज

यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है

– **फ्यूल एंड पावर**: 13.15% का वेटेज

– **मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स**: 64.23% का वेटेज

इन घटकों के आधार पर, मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स का वेटेज सबसे अधिक है, जो कि थोक महंगाई में सबसे बड़ा योगदान देता है।

## रिटेल महंगाई में भी वृद्धि

दिसंबर में रिटेल महंगाई भी बढ़कर 1.33% पर पहुंच गई है, जो कि पिछले तीन महीनों का उच्चतम स्तर है। नवंबर में यह 0.71% थी, और अक्टूबर में यह 0.25% पर थी, जो पिछले 14 वर्षों में सबसे कम स्तर था। रिटेल महंगाई की यह वृद्धि भी आम उपभोक्ताओं पर प्रभाव डालती है और बाजार में महंगाई की स्थिति को दर्शाती है।

## आम नागरिक पर प्रभाव

थोक महंगाई में बढ़ोतरी का सीधा असर आम नागरिक पर पड़ता है। जब थोक मूल्य लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रहते हैं, तो उत्पादक मजबूर होते हैं कि वे इसे उपभोक्ताओं पर डालें। इससे उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि होती है, जिससे आम आदमी की खरीददारी की क्षमता प्रभावित होती है।

सरकार केवल टैक्स के माध्यम से WPI को नियंत्रित कर सकती है। उदाहरण के लिए, जब कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई, तो सरकार ने ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की थी। हालांकि, टैक्स में कमी की सीमा होती है, और इसके प्रभाव सीमित हो सकते हैं।

## महंगाई के सूचकांक

भारत में महंगाई को मापने के लिए दो प्रमुख सूचकांक होते हैं: रिटेल महंगाई (CPI) और थोक महंगाई (WPI)।

– **रिटेल महंगाई**: यह दर आम उपभोक्ताओं द्वारा दी जाने वाली कीमतों पर आधारित होती है।

– **थोक महंगाई**: यह दर उन कीमतों पर आधारित होती है, जो थोक बाजार में एक कारोबारी दूसरे कारोबारी से वसूलता है।

### WPI और CPI का अंतर

थोक महंगाई में मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी 63.75%, प्राइमरी आर्टिकल्स जैसे खाद्य पदार्थों की 22.62%, और फ्यूल एंड पावर की 13.15% होती है। वहीं, रिटेल महंगाई में खाद्य पदार्थों और उत्पादों की हिस्सेदारी 45.86%, आवास की 10.07%, और फ्यूल सहित अन्य आइटम्स की भी हिस्सेदारी होती है।

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दिसंबर में थोक महंगाई का 0.83% पर पहुंचना और रिटेल महंगाई का 1.33% होना, दोनों ही संकेत देते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था में महंगाई का दबाव बढ़ रहा है। यह स्थिति न केवल उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय है, बल्कि सरकार के लिए भी चुनौती पेश करती है। उचित नीतियों और उपायों के माध्यम से इस महंगाई को नियंत्रित करना आवश्यक है, ताकि आम जनता पर इसका नकारात्मक प्रभाव कम से कम हो सके।

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