टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स को FY26 की तीसरी तिमाही में ₹3,486 करोड़ का कॉन्सोलिडेटेड घाटा हुआ है। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को ₹5,406 करोड़ का मुनाफा हुआ था। साइबर अटैक और चीन के बाजार में सुस्ती की वजह से जगुआर लैंड रोवर (JLR) के बिजनेस पर बुरा असर पड़ा, जिससे कंपनी के कुल रेवेन्यू और मुनाफे में ये गिरावट दर्ज की गई है। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में रेवेन्यू 26% कम हुआ टाटा मोटर्स का ऑपरेशंस से मिलने वाला रेवेन्यू सालाना आधार पर 26% गिरकर ₹70,108 करोड़ रह गया है। पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹94,738 करोड़ के करीब था। कंपनी ने बताया कि साइबर हमले की वजह से JLR का रेवेन्यू 39% गिरकर करीब ₹55,000 करोड़ रह गया। JLR को इस तिमाही में टैक्स से पहले करीब ₹3,800 करोड़ का घाटा हुआ है। चीन के बाजार में सुस्ती और पुराने मॉडल का असर घरेलू बाजार में गाड़ियों की बिक्री 22% बढ़ी JLR के खराब प्रदर्शन के उलट, टाटा मोटर्स के भारतीय कारोबार ने मजबूत पकड़ बनाए रखी है। GST दरों में कटौती और नई गाड़ियों की अच्छी डिमांड के चलते घरेलू पैसेंजर और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की बिक्री 22% बढ़कर 1.71 लाख यूनिट रही। CFO को चौथी तिमाही में अच्छी रिकवरी का भरोसा टाटा मोटर्स के CFO धीमन गुप्ता ने कहा, “यह तिमाही चुनौतियों भरी रही जैसा कि साइबर अटैक के कारण अंदेशा था। हालांकि घरेलू बिजनेस ने सुधार दिखाया है। हमें उम्मीद है कि चौथी तिमाही में JLR के सामान्य होने से प्रदर्शन सुधरेगा।” कॉन्सोलिडेटेड मुनाफा मतलब पूरे ग्रुप का प्रदर्शन कंपनियों के रिजल्ट दो भागों में आते हैं- स्टैंडअलोन और कॉन्सोलिडेटेड। स्टैंडअलोन में केवल एक यूनिट का वित्तीय प्रदर्शन दिखाया जाता है। जबकि, कॉन्सोलिडेटेड या समेकित फाइनेंशियल रिपोर्ट में पूरी कंपनी की रिपोर्ट दी जाती है। यहां, टाटा मोटर्स की जगुआर लैंड रोवर जैसी 100 से ज्यादा सब्सिडियरी और एसोसिएट कंपनियां हैं। इन सभी के फाइनेंशियल रिपोर्ट को मिलाकर कॉन्सोलिडेटेड कहा जाएगा। वहीं, अगर जगुआर लैंड रोवर के अलग रिजल्ट को स्टैंडअलोन कहा जाएगा।
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