वोडाफोन-आइडिया के शेयर 8% तक उछले:कर्ज चुकाने के लिए 15 साल समय मिला; एक्सपर्ट्स बोले- यह टर्निंग पॉइंट या 'टिकिंग टाइम बम'

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# वोडाफोन-आइडिया के शेयरों में 8% की वृद्धि: कर्ज संकट में नई राहत

मुख्य बिंदु

# वोडाफोन-आइडिया के शेयरों में 8% की वृद्धि: कर्ज संकट में नई राहत

## कर्ज संकट से जूझती वोडाफोन-आइडिया का नया मोड़

विस्तृत जानकारी

भारत की प्रमुख टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन-आइडिया (Vi) ने शुक्रवार, 9 जनवरी को अपने शेयरों में 8% की वृद्धि दर्ज की। कंपनी के शेयर ₹12.40 के इंट्राडे हाई पर पहुंचे, जो एक सकारात्मक संकेत है। यह वृद्धि तब आई जब सरकार ने एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) बकाया चुकाने के लिए नई समय-सीमा और राहत की घोषणा की।

## AGR बकाया चुकाने की नई समय-सीमा

सरकार की नई योजना के अनुसार, वोडाफोन-आइडिया को अगले 15 वर्षों में किश्तों में कर्ज चुकाने का समय दिया गया है। यह पेमेंट प्लान मार्च 2026 से शुरू होगा और 2041 तक चलेगा। टेलीकॉम विभाग (DoT) के अनुसार, कंपनी को FY 2006-07 से FY 2018-19 तक के AGR बकाया के लिए एक पेमेंट प्लान प्राप्त हुआ है। इसके अतिरिक्त, सरकार एक नई कमेटी का गठन करेगी जो AGR देनदारियों की दोबारा समीक्षा करेगी।

यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है

## विश्लेषकों की राय: क्या यह एक टर्नअराउंड है?

वोडाफोन-आइडिया के लिए यह एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है। एडलिटिक के फाउंडर आदित्य अरोड़ा का कहना है कि अब वोडाफोन-आइडिया केवल ‘सर्वाइवल’ की लड़ाई नहीं लड़ रही, बल्कि यह एक ‘टर्नअराउंड’ की कहानी बन रही है। वहीं, नटवरलाल एंड संस के समीर दलाल इसे ‘टिकिंग टाइम बम’ मानते हैं। उनका मानना है कि केवल पेमेंट की तारीख बढ़ाने से कंपनी की मूल समस्या हल नहीं होती।

## निवेशकों के लिए सलाह: स्थिति बनाए रखें

तकनीकी दृष्टिकोण से, कुशबोहरा के फाउंडर कुश बोहरा ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे अपनी पोजीशन होल्ड करें। उन्होंने बताया कि शेयर दिसंबर के अंत से ₹12 के आसपास कंसोलिडेट हो रहा है और ₹12 के स्तर पर भारी रेजिस्टेंस है। निवेशकों को ₹11.30 का स्टॉप-लॉस लगाने की सलाह दी गई है। वर्तमान में, शेयर 2.40% बढ़कर ₹11.78 के करीब ट्रेड कर रहा है। पिछले 6 महीनों में इस शेयर में 60% की वृद्धि हुई है।

## वोडाफोन-आइडिया पर विश्लेषकों की राय

हालांकि, ब्लूमबर्ग के डेटा के अनुसार, वोडाफोन-आइडिया को ट्रैक करने वाले 22 एनालिस्ट्स में से केवल 5 ने ‘Buy’ रेटिंग दी है। वहीं, 10 ने इसे बेचने और 7 ने होल्ड करने की सलाह दी है।

## केंद्र सरकार की हिस्सेदारी और AGR का बोझ

वोडाफोन-आइडिया में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी लगभग 49% है, जिससे वह सबसे बड़ी शेयरहोल्डर बन गई है। पिछले कुछ वर्षों में, कंपनी ने अपने स्पेक्ट्रम और ब्याज बकाए को इक्विटी में बदल दिया, जिसके कारण सरकार की हिस्सेदारी बढ़ी। AGR से वोडाफोन-आइडिया पर ₹83,400 करोड़ का कर्ज है।

## संकट का इतिहास: 1994 से शुरू हुआ सफर

वोडाफोन-आइडिया के लिए यह संकट 1994 में मोबाइल सेवाओं की शुरुआत से शुरू हुआ। उस समय कंपनियों को सरकार को एक फिक्स्ड सालाना फीस देनी होती थी। 1999 में जब सरकार ने पॉलिसी बदली, तब टेलीकॉम कंपनियों को अपनी कमाई के आधार पर लाइसेंस फीस चुकानी पड़ी। इसी दौरान विवाद शुरू हुआ, जिसमें टेलीकॉम कंपनियों और टेलीकॉम विभाग (DoT) के बीच “कमाई” की परिभाषा को लेकर मतभेद उभरे।

कंपनियों का कहना था कि AGR में केवल उनकी मुख्य सेवाओं से होने वाली कमाई ही शामिल होनी चाहिए, जबकि सरकार ने किराया, ब्याज, और पुराने टावर बेचने से होने वाले मुनाफे को भी शामिल किया। 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसके बाद कंपनियों पर हजारों करोड़ का बकाया निकल आया। वोडाफोन-आइडिया पर यह बोझ सबसे ज्यादा पड़ा क्योंकि इसमें दो कंपनियों का पुराना बकाया शामिल था।

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वोडाफोन-आइडिया की स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण है, लेकिन सरकार द्वारा दी गई नई राहत के बाद कंपनी को एक नई उम्मीद मिली है। निवेशकों को इस स्थिति पर ध्यान देना चाहिए और विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार अपने निवेश को सुरक्षित रखना चाहिए।

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