देश का सबसे बड़ा IPO जून तक आ सकता है:जियो का 2.5% हिस्सेदारी बेचकर ₹37,000 करोड़ जुटाने का प्लान; ₹20 लाख करोड़ तक हो सकती है वैल्यूएशन

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# रिलायंस जियो का IPO: मुकेश अंबानी की नई योजना

मुख्य बिंदु

# रिलायंस जियो का IPO: मुकेश अंबानी की नई योजना

## मुकेश अंबानी का महत्वाकांक्षी कदम

विस्तृत जानकारी

रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमुख मुकेश अंबानी अपनी टेलीकॉम कंपनी ‘रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स’ को शेयर बाजार में लाने की योजना बना रहे हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी इस साल अपना आईपीओ (IPO) पेश कर सकती है, जिसमें 2.5% हिस्सेदारी बेची जाएगी। अगर यह कदम उठाया जाता है, तो यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ होगा, जिसकी अनुमानित वैल्यू 4 बिलियन डॉलर (लगभग 37,000 करोड़ रुपये) से अधिक हो सकती है।

## रिलायंस जियो की उपयोगकर्ता संख्या

रिलायंस जियो के पास वर्तमान में 50 करोड़ से ज्यादा उपयोगकर्ता हैं, और इसके आईपीओ का बाजार में बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। निवेश बैंक जेफरीज ने पिछले साल नवंबर में जियो की वैल्यूएशन लगभग 180 बिलियन डॉलर (16 लाख करोड़ रुपये) आंकी थी। हालांकि, अब कुछ बैंकर्स इसकी वैल्यूएशन 200 से 240 बिलियन डॉलर (लगभग 20 लाख करोड़ रुपये) के बीच बता रहे हैं। इस वैल्यूएशन के हिसाब से 2.5% हिस्सेदारी बेचने पर भी जियो पिछले साल आए हुंडई मोटर इंडिया के ₹27,000 करोड़ के आईपीओ को पीछे छोड़ देगी।

यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है

## सेबी के नियमों में बदलाव की प्रतीक्षा

रिलायंस जियो ने मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) के नियमों में बदलाव का इंतजार कर रही है, जिसमें बड़ी कंपनियों को आईपीओ के समय 5% के बजाय न्यूनतम 2.5% हिस्सेदारी बेचने की अनुमति मिल सकती है। सूत्रों के मुताबिक, कंपनी कम हिस्सेदारी बेचना चाहती है ताकि मार्केट में शेयरों की मांग बनी रहे।

## बैंकों की नियुक्ति और IPO की तैयारी

हालांकि, बैंकों की औपचारिक नियुक्ति अभी नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि मॉर्गन स्टेनली और कोटक महिंद्रा बैंक के अधिकारी आईपीओ की पेपर (DRHP) तैयार करने के लिए रिलायंस के साथ काम कर रहे हैं। मुकेश अंबानी ने पिछले साल अगस्त में इस बात के संकेत दिए थे कि जियो की लिस्टिंग 2026 की पहली छमाही में हो सकती है, लेकिन अंतिम फैसला बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।

## विदेशी निवेशकों के लिए अवसर

पिछले 6 वर्षों में, रिलायंस जियो ने केकेआर (KKR), सिल्वर लेक और गूगल जैसे बड़े वैश्विक निवेशकों से फंड जुटाया है। माना जा रहा है कि इस आईपीओ के जरिए कई विदेशी निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचकर मुनाफा कमा सकते हैं।

## जियो का डिजिटल विस्तार

जियो अब केवल एक टेलीकॉम कंपनी नहीं रह गई है, बल्कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल सेवाओं में भी तेजी से विस्तार कर रही है। कंपनी ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए एनवीडिया के साथ साझेदारी की है।

## प्रतिस्पर्धा का सामना

बाजार में जियो की प्रतिस्पर्धा इलॉन मस्क की स्टारलिंक से होगी, जो जल्द ही भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने वाली है। जियो की रणनीति और इसके आईपीओ का बाजार पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

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रिलायंस जियो का आईपीओ भारतीय शेयर बाजार में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। इसके साथ ही, इस कदम से कंपनी की वैल्यूएशन और बाजार में प्रतिस्पर्धा को नई दिशा मिल सकती है। जैसे-जैसे यह प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, निवेशकों और विश्लेषकों की नजरें इस आईपीओ पर बनी रहेंगी।

इस तरह, मुकेश अंबानी की अगुवाई में रिलायंस जियो का आईपीओ न केवल कंपनी के लिए, बल्कि पूरे भारतीय बाजार के लिए एक नया अध्याय खोल सकता है।

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