गाड़ियां करीब आते ही खुद एक-दूसरे को अलर्ट देंगी:नए व्हीकल में 2026 के अंत तक V2V चिप जरूरी, 5-7 हजार तक कीमत बढ़ेगी

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## केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने की V2V तकनीक की घोषणा

मुख्य बिंदु

## केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने की V2V तकनीक की घोषणा

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण घोषणा की है, जिसमें उन्होंने बताया कि सरकार 2026 के अंत तक ‘व्हीकल-टू-व्हीकल’ (V2V) कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी को अनिवार्य करने की योजना बना रही है। यह तकनीक वाहनों को एक-दूसरे को सुरक्षा अलर्ट भेजने में सक्षम बनाएगी, जिससे सड़क पर टक्कर और अन्य हादसों को रोका जा सकेगा। यह निर्णय 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के परिवहन मंत्रियों की बैठक के बाद लिया गया है।

विस्तृत जानकारी

### सड़क दुर्घटनाओं को कम करने का लक्ष्य

सरकार का यह कदम देश में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को 2030 तक 50% तक कम करने के लक्ष्य के तहत है। गडकरी ने यह स्पष्ट किया है कि V2V तकनीक का कार्यान्वयन न केवल सुरक्षा में सुधार करेगा, बल्कि यह सड़क परिवहन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन भी लाएगा।

### V2V तकनीक कैसे काम करेगी?

यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है

नितिन गडकरी ने बताया कि V2V प्रणाली लागू होने के बाद, वाहन एक-दूसरे से संचार कर सकेंगे, जैसे कि पायलट आसमान में बात करते हैं। हर वाहन में एक ‘ऑन-बोर्ड यूनिट’ (OBU) स्थापित की जाएगी, जो आसपास की अन्य गाड़ियों को अपनी लोकेशन, स्पीड, दिशा और ब्रेक लगाने जैसी जानकारी वायरलेस तकनीक के माध्यम से भेजेगी। इस तकनीक के कारण, ड्राइवर को खतरा दिखने से पहले ही अलर्ट मिल जाएगा, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना कम हो जाएगी।

### V2V तकनीक के लाभ

V2V तकनीक उन स्थितियों में सबसे प्रभावी होगी, जहां परंपरागत कैमरा या रडार काम नहीं कर पाते, जैसे कि कोहरे और अंधे मोड़ पर। यह तकनीक ड्राइवरों को संभावित खतरों के बारे में पहले से सचेत करके सुरक्षा को बढ़ाएगी।

### आर्थिक पहलू और लागत

सरकार इस प्रोग्राम पर लगभग 5,000 करोड़ रुपए खर्च करने की योजना बना रही है। हालांकि, OBU की कीमत 5,000 से 7,000 रुपए के बीच होने का अनुमान है। शुरुआत में इसे नई कारों, बसों और ट्रकों के लिए अनिवार्य किया जा सकता है। भविष्य में, पुरानी गाड़ियों के लिए इसे अलग से लगवाने का नियम भी आ सकता है। इस बदलाव से गाड़ियों की कीमतें बढ़ने की संभावना है।

### तकनीकी मानकों का निर्धारण

V2V सिस्टम को संचालित करने के लिए विशेष फ्रीक्वेंसी की आवश्यकता होती है। गडकरी ने बताया कि दूरसंचार विभाग (DoT) के साथ एक संयुक्त कार्यबल (जॉइंट टास्क फोर्स) बनाई गई है, जो 5.875-5.905GHz बैंड में 30MHz स्पेक्ट्रम आवंटित करने के लिए सहमत हो गई है। सड़क परिवहन सचिव वी. उमाशंकर के अनुसार, ऑटो कंपनियों के साथ तकनीकी मानकों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

### ADAS और V2V तकनीक में अंतर

हालांकि सरकार ने 2026 की समयसीमा तय की है, लेकिन यह चुनौतीपूर्ण लक्ष्य है। ADAS (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम) और V2V तकनीक में एक महत्वपूर्ण अंतर है। ADAS केवल वही देख सकता है जो कैमरे के सामने है, जबकि V2V तकनीक वायरलेस सिग्नल पर काम करती है। इसका मतलब है कि यदि आपके आगे एक बड़ा ट्रक चल रहा है और उसके आगे कोई खतरा है, तो ADAS उसे नहीं देख पाएगा, लेकिन V2V के जरिए आगे वाली गाड़ी का सिग्नल आपकी कार तक पहुंच जाएगा।

### टाटा मोटर्स का नया मॉडल

इससे जुड़ी अन्य खबरों में, टाटा मोटर्स ने हाल ही में अपनी सबसे लोकप्रिय माइक्रो SUV पंच का फेसलिफ्ट मॉडल लॉन्च किया है। नई पंच का डिजाइन इसके इलेक्ट्रिक वर्जन पंच-ईवी से प्रेरित है, और इसमें फ्रंट और रियर लुक में बड़े बदलाव किए गए हैं, जिससे यह पहले से ज्यादा प्रीमियम और आधुनिक दिख रही है।

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केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की यह घोषणा न केवल सड़क सुरक्षा में सुधार लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में भी एक नई क्रांति का आगाज़ कर सकती है। V2V तकनीक का कार्यान्वयन आने वाले वर्षों में सड़क परिवहन को और अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाने में मदद करेगा।

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