अब AI और प्रीमियम कैमरा पर फोकस:ओप्पो इंडिया कम्युनिकेशन हेड बोले- महंगे फोन खरीद रहे लोग, ₹80000+ वाले सेगमेंट में 37% की ग्रोथ

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ओप्पो के भारत में 11 साल के सफर और 10 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों के भरोसे के साथ कंपनी अब अपनी रणनीति बदल रही है। आखिर क्यों अब लोग सस्ते फोन के बजाय प्रीमियम और महंगे फोन पसंद कर रहे हैं? और क्या आने वाले समय में मोबाइल की कीमतें कम होंगी? इन सभी सवालों पर ओप्पो इंडिया कम्युनिकेशन हेड गोल्डी पटनायक ने खुलकर बात की। पढ़ें इंटरव्यू के मुख्य अंश… सवाल: भारत दुनिया के सबसे बड़े और सबसे कॉम्पिटिटिव स्मार्टफोन बाजारों में से एक बना हुआ है। ओप्पो के नजरिए से देखें तो पिछले पांच सालों में कामयाबी के पैमाने किस तरह बदले हैं? जवाब 1 : भारत में हमें 11 साल से ज्यादा हो चुके हैं और हमारे पास 10 करोड़ से ज्यादा यूजर्स का बेस है। हमने इस कड़े मुकाबले वाले मार्केट को करीब से बदलते देखा और खुद को उसी हिसाब से ढाला। पांच साल पहले कामयाबी का मतलब बड़े पैमाने पर सेल, डिस्ट्रीब्यूशन और कम कीमतें था। तब ब्रांड्स का ध्यान हर सेगमेंट तक पहुंच और ऑफलाइन मौजूदगी पर था। आज मार्केट मैच्योर है। अब लोग प्रीमियम फोन की तरफ बढ़ रहे हैं और फोन लंबे समय तक इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका मतलब है कि ग्राहक अब सिर्फ कीमत नहीं, बल्कि वैल्यू देखते हैं। स्मार्टफोन की भूमिका बदल गई है, खासकर युवाओं के लिए। यह अब सिर्फ डिवाइस नहीं, बल्कि खुद को एक्सप्रेस करने का जरिया है। सवाल 2 : पिछले कुछ सालों में भारत के स्मार्टफोन मार्केट में कई रेगुलेटरी और मार्केट बदलाव आए हैं। इसे देखते हुए ओप्पो ने अपनी लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी में क्या बदलाव किए हैं? जवाब: स्मार्टफोन का इस्तेमाल बदल गया है। 5G, AI और बदलती लाइफस्टाइल ने इसे डायनेमिक बना दिया है। UPI पेमेंट, OTT पर फिल्में, गेमिंग और कंटेंट क्रिएशन—सब में स्मार्टफोन रोजमर्रा का हिस्सा है। ओप्पो में हम इन बदलावों, खासकर युवाओं की आदतों को ट्रैक कर उन्हें प्रोडक्ट्स में शामिल करते हैं। सवाल 3 : सैमसंग और एप्पल जैसे बड़े खिलाड़ियों से मिल रही टक्कर के बीच, प्रीमियम सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कंपनी का क्या प्लान है? जवाब: भारत में प्रीमियम सेगमेंट तेजी से बढ़ रहा है। लोग ऐसे फोन चाहते हैं जिनमें कैमरा, परफॉरमेंस और डिजाइन फ्लैगशिप लेवल का हो। ओप्पो के लिए कैमरा और इमेजिंग खास रहे हैं, खासकर Find X और Reno सीरीज में। फोकस पोर्ट्रेट फोटोग्राफी पर है। इसके लिए भारतीय यूजर्स के हिसाब से कैमरा ट्यून किया जाता है, जिसमें LUMO इमेज इंजन और हैसलब्लैड की पार्टनरशिप मदद करती है। ColorOS और AI फोन को स्मूथ और स्मार्ट बनाते हैं। सवाल 4: क्या आपको लगता है कि भारत धीरे-धीरे फ्लैगशिप स्मार्टफोन मार्केट बन रहा है? या मिड-प्रीमियम कैटेगरी ही सबसे ज्यादा एक्टिव रहेगी? जवाब: दोनों सेगमेंट की अपनी जगह है। अहम यह है कि युवा पहला स्मार्टफोन खरीदते समय क्या सोचते हैं। IDC के मुताबिक, 2025 में प्रीमियम सेगमेंट 37% बढ़ा, जबकि मिड-प्रीमियम 23% बढ़ा। कई लोगों के लिए फ्लैगशिप फोन खरीदना बड़ी उपलब्धि है, जो उनकी पर्सनैलिटी और काम से जुड़ा है। इसमें कैमरा, परफॉरमेंस और डिजाइन अहम हैं। EMI, एक्सचेंज और ऑफर्स से फ्लैगशिप खरीदना आसान हुआ है। सवाल 4: आज स्मार्टफोन तेजी से AI-ड्रिवन हो रहे हैं। ओप्पो नई टेक्नोलॉजी और यूजर की प्राइवेसी के बीच कैसे तालमेल बिठा रहा है? जवाब: ओप्पो के लिए AI एक्स्ट्रा फीचर नहीं, बल्कि डिजाइन का हिस्सा है। हमने AI पहले ही अपना लिया था, चाहे HyperTone इंजन हो या बैटरी और प्रोडक्टिविटी फीचर्स। हमारा फोकस AI इमेजिंग, क्रिएटिविटी और प्रोडक्टिविटी पर है। मकसद AI को असल जिंदगी में उपयोगी बनाना है। प्राइवेसी के लिए ‘प्राइवेट कंप्यूटिंग क्लाउड’ से जरूरी डेटा सुरक्षित रखा जाता है। सवाल 5: हाल ही में, आपकी कंपनी ने चिप की कमी के कारण मोबाइल की कीमतें बढ़ाई थीं। क्या चिप की सप्लाई ठीक होने के बाद कीमतें फिर से कम होने की उम्मीद कर सकते हैं? जवाब: इंडस्ट्री में लागत और सप्लाई की चुनौतियां हैं, लेकिन फोकस ग्राहकों को ज्यादा वैल्यू देने पर है। कीमतों पर फैसला इनोवेशन, क्वालिटी और पहुंच को ध्यान में रखकर होगा। सवाल 6: स्मार्टवॉच और ईयरबड्स सेगमेंट में आप अभी सैमसंग और रेडमी जैसे मुकाबले में पीछे हैं। क्या इस कैटेगरी में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का कोई प्लान है? जवाब: ओप्पो इंडिया के पोर्टफोलियो में स्मार्टफोन, टैबलेट और ईयरबड्स हैं, जिनमें ग्रोथ की गुंजाइश है। 2026 में लक्ष्य इन कैटेगरीज में पकड़ मजबूत करना है। फिलहाल फोकस मौजूदा प्रोडक्ट्स में नई टेक्नोलॉजी लाने और उन्हें बेहतर बनाने पर है। इसी आधार पर वियरेबल मार्केट में धीरे-धीरे विस्तार होगा।

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