सेबी के अंतरिम आदेश के बाद राजेश एक्सपोर्ट्स के प्रमोटर और चेयरमैन का कहना है कि मीडिया में चल रही 15.15 लाख करोड़ रुपए के घोटाले की बातें पूरी तरह से गलत हैं। यह केवल आंकड़ों को गलत तरीके से पढ़ने के कारण पैदा हुआ कन्फ्यूजन है। एक शेयरधारक की शिकायत पर सेबी ने यह जांच शुरू की थी। इसमें कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया था। सेबी ने अपने 109 पन्नों के आदेश में कहा कि कंपनी ने अपने कुल राजस्व का 99% हिस्सा गलत तरीके से दिखाया है। पढ़िए राजेश एक्सपोर्ट के चेयरमैन राजेश मेहता का पूरा इंटरव्यू… सवाल 1: सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स का 99% रेवेन्यू इन्फ्लेटेड बताया है? सच क्या है? जवाब: यह सेबी का अंतरिम आदेश है… फाइनल ऑर्डर नहीं है। ये आरोप भी नहीं ऑब्जर्वेशन्स है। पिछले 2-3 दिनों से मीडिया रिपोर्ट्स में जो दावा किया जा रहा है कि राजेश एक्सपोर्ट्स में 15.15 लाख करोड़ रुपए का कोई घोटाला हुआ है, रेवेन्यू गलत दिखाया गया है या फिर झूठा एक्सपोर्ट किया गया है.. ऐसा कुछ भी नहीं है। ये सिर्फ समझने का मामला है। सवाल 2: SEBI ने कंपनी के खिलाफ क्या एक्शन लिया है, क्या कोई जुर्माना लगा है? जवाब: नहीं, SEBI ने कंपनी पर कोई जुर्माना या पेनल्टी नहीं लगाई है। SEBI को कुछ आंकड़ों पर केवल शंका थी, जिसके आधार पर उन्होंने ऑब्जर्वेशन दिए हैं और कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा है। सवाल 3: SEBI को कंपनी के रेवेन्यू और सेल्स को लेकर क्या संदेह है? जवाब: SEBI का संदेह यह है कि कंपनी ने 5 सालों (2021-2025) के दौरान अपनी बिक्री को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया है। लेकिन, बात ये हैं कि SEBI ने आंकड़ों को समझने में थोड़ी चूक की है। उन्होंने शायद बिक्री के कुल आंकड़ों की जगह कंपनी के EBITDA के आंकड़ों को जोड़ लिया, जिससे उन्हें कुल सेल्स और बुक्स में बड़ा अंतर दिखाई दिया और यह संदेह पैदा हुआ। सवाल 4: यह 15.15 लाख करोड़ रुपए का रेवेन्यू असल में कहां से आया है? जवाब: यह रेवेन्यू राजेश एक्सपोर्ट्स की स्विट्जरलैंड स्थित एक स्टेप-डाउन सब्सिडियरी कंपनी वालकाम्बी का है। वालकाम्बी दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे प्रतिष्ठित गोल्ड रिफाइनरी है। यह कंपनी दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों और बड़े बुलियन डीलर्स को सोना बेचती है। कंपनी ने साल 2020 से 2025 तक के 5 सालों की बिक्री के बिल्कुल सही आंकड़े SEBI को सौंपे हैं। राजेश एक्सपोर्ट्स का रेवेन्यू (करोड़ रुपए में) सवाल 5: गोल्ड रिफाइनरी के बिजनेस का रेवेन्यू मॉडल क्या होता है? जवाब: सोने के कारोबार में टर्नओवर बहुत बड़ा होता है, लेकिन प्रॉफिट मार्जिन बेहद कम होता है। इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए वालकाम्बी ने खदानों से ₹100 का अशुद्ध सोना इम्पोर्ट किया। उसे अपनी रिफाइनरी में प्रोसेस करके शुद्ध किया और बाजार में ₹101 में बेच दिया। इस स्थिति में कंपनी की कुल बिक्री ₹101 दर्ज होगी, जबकि ग्रॉस प्रॉफिट सिर्फ ₹1 होगा। सारे खर्चे काटने के बाद शुद्ध मुनाफा केवल 25 से 50 पैसे ही बचता है। SEBI ने इसी ₹1 के ग्रॉस प्रॉफिट को बेस मानकर बची हुई बड़ी बिक्री को मिसिंग समझ लिया, जबकि वह टर्नओवर का हिस्सा थी। सवाल 6: राजेश एक्सपोर्ट्स का रेवेन्यू मॉडल कैसे काम करता है? जवाब: कंपनी का टोटल रेवेन्यू दो मुख्य सोर्सेज से आता है, जिन्हें मिलाकर स्टॉक एक्सचेंज को ‘कंसॉलिडेटेड’ आंकड़े दिए जाते हैं: सवाल 7: क्या कंपनी ने फोरेंसिक ऑडिटर्स का सहयोग नहीं किया और डेटा छुपाया? जवाब: ये गलत बात है क्योंकि 2.5 साल से फॉरेंसिक ऑडिट चल रहा है। हमने कंपनी के ऑडिटर्स को पूरा सहयोग किया है और नियमों के मुताबिक सभी जरूरी वित्तीय रिकॉर्ड्स का एक्सेस दिया था। फॉरेंसिक ऑडिटर्स 3 महीने तक ऑफिस में बैठे रहे। फोरेंसिक ऑडिटर्स को ERP सिस्टम और बुक्स ऑफ अकाउंट्स का एक्सेस नहीं देने के दावें पूरी तरह से गलत है। सवाल 8: प्रमोटर के पर्सनल अकाउंट में ₹338 करोड़ के ट्रांसफर पर क्या कहना है? जवाब: यह लेन-देन पूरी तरह पारदर्शी था। यह पैसा किस बिजनेस कारण से आया था और क्यों वापस गया, इसका पूरा विवरण और स्पष्टीकरण SEBI को दे दिया गया है। सवाल 9: क्या प्रमोटर्स ने कंपनी के पैसे का कोई व्यक्तिगत इस्तेमाल किया है? जवाब: प्रमोटर्स ने अपने निजी इस्तेमाल के लिए कंपनी से एक भी रुपया नहीं निकाला है। उल्टा, राजेश एक्सपोर्ट्स एक ऐसी कंपनी रही है जहां प्रमोटर्स ने जरूरत पड़ने पर हमेशा अपनी जेब से कंपनी को फंड दिया है। कंपनी के फंड का कोई गलत इस्तेमाल या पर्सनल बेनेफिट नहीं लिया गया है। सवाल 10: कंपनी में में LIC की 10% हिस्सेदारी है। क्या इससे आम निवेशकों को नुकसान हुआ? जवाब: LIC हमारी कंपनी में पिछले 15 से 20 सालों से धीरे-धीरे शेयर्स जमा कर रही है। वे हर साल ओपन मार्केट से थोड़ा-बहुत हिस्सा खरीदते रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पिछले 4-5 सालों से LIC ने हमारी कंपनी का एक भी नया शेयर नहीं खरीदा है। यह निवेश बहुत लंबा और पुराना है। इसमें किसी भी आम निवेशक का कोई नुकसान नहीं हुआ है। सवाल 11: क्या कंपनी या प्रमोटर्स ने अपने शेयर्स सीधे LIC को बेचे हैं? जवाब: न तो कंपनी ने और न ही प्रमोटर ने आज तक अपना एक भी शेयर LIC को बेचा है। प्रमोटर्स के पास पहले दिन जितने शेयर्स थे, आज भी उतने ही हैं। बल्कि हमने तो समय-समय पर मार्केट से और शेयर्स खरीदे हैं क्योंकि हमें अपनी कंपनी पर पूरा भरोसा है। LIC ने जो भी शेयर्स लिए हैं, वो स्टॉक एक्सचेंज के जरिए सीधे ओपन मार्केट से खरीदे हैं। सवाल 12: शेयरों में पैनिक सेलिंग हो रही है जिससे आम इन्वेस्टर्स डरे हुए हैं। उन्हें क्या सलाह देंगे? जवाब: मैं इन्वेस्टर्स से यही कहूंगा कि शेयर्स पर जो भी दबाव दिख रहा है, वह सिर्फ बाहरी माहौल और अफवाहों की वजह से है। कंपनी का कामकाज बेहद मजबूत है और भविष्य में भी हम अच्छा प्रदर्शन करेंगे। निवेशकों को पैनिक करने या घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। यह सिर्फ एक अस्थाई हवा है। कभी-कभी लगता है कि कोई जानबूझकर ऐसी हवा बना रहा है ताकि हमारे शेयर्स को कम दाम में खरीद सके। जैसे ही यह माहौल शांत होगा, शेयर अपनी असली वैल्यू पर वापस पहुंच जाएगा। सवाल 13: क्या सेल्स का आंकड़ा बड़ा दिखाने से कोई अतिरिक्त फायदा मिलता है? जवाब: जी नहीं, बल्कि इसका उल्टा होता है। अगर मैं बिना वजह रेवेन्यू को बढ़ाकर दिखाऊंगा और मेरा प्रॉफिट उतना ही रहेगा, तो मेरी प्रॉफिटेबिलिटी का प्रतिशत कम हो जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि आप 100 रुपये पर 10 रुपए कमाते हैं, तो प्रॉफिट 10% दिखता है। लेकिन अगर आप सेल्स को जबरन 10 हजार रुपए दिखा दें और प्रॉफिट 10 रुपए ही रहे, तो मुनाफा सिर्फ 0.1% रह जाएगा। सेल्स बढ़ाने से हमारा ही नुकसान है। अगर सेबी कहे कि रेवेन्यू मत दिखाओ, सिर्फ ग्रॉस प्रॉफिट दिखाओ, तो हम कल से रेवेन्यू दिखाना बंद कर देंगे। हमें किसी बैंक को इम्प्रेस करने के लिए झूठे नंबर्स की जरूरत नहीं है। सवाल 14: क्या राजेश एक्सपोर्ट पर किसी बैंक या संस्था का कर्ज है? जवाब: हमारी कंपनी पूरी तरह से डेट-फ्री कंपनी है। हमें दुनिया के किसी भी बैंक, संस्था या एंटिटी को एक भी रुपया नहीं देना है। इसके विपरीत, हमें दुनिया भर के कई लोगों से पैसे लेने हैं। जब हमने कहीं से कोई लोन ही नहीं लिया और पूरा बिजनेस अपने दम पर चला रहे हैं, तो हमें नंबर्स के साथ छेड़छाड़ करने की कोई जरूरत ही नहीं है। हमारे सभी फाइनेंशियल अकाउंट्स बिल्कुल क्लीन हैं। सवाल 15: BSE और NSE को जो जवाब भेजे गए हैं, उन पर आगे की क्या अपडेट है? जवाब: हमने 4 तारीख को BSE और NSE को जवाब भेजा था, इसके बाद 5 और 6 तारीख को भी जरूरी स्पष्टीकरण दिए गए हैं। हमने इस संबंध में प्रेस रिलीज भी जारी की है। हम उन्हें पिछले 5 साल की ऑडिटेड बैलेंस शीट और सेल्स का पूरा डेटा सौंप रहे हैं। सवाल 16: स्विस डेटा प्रोटेक्शन के नियमों का हवाला देकर फॉरेन सब्सिडियरी की जानकारी छिपाने के जो आरोप लग रहे हैं, उस पर आपकी क्या सफाई है? जवाब: हमने स्विस सब्सिडियरीज की सभी ऑडिटेड बैलेंस शीट पूरे शेड्यूल्स के साथ जमा कर दी हैं। यह बैलेंस शीट प्रतिष्ठित वैश्विक फर्म KPMG द्वारा ऑडिटेड है। जहां तक कुछ विशेष डेटा को रोकने की बात है, तो वो नॉन डिस्क्लोजर एग्रीमेंट और इंटरनेशनल सीक्रेसी लॉ के तहत आता है। सवाल 17: वह कौन सी जानकारी है जिसे साझा नहीं किया जा सकता और क्यों? जवाब: अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक, किस देश के सेंट्रल बैंक को कितना सोना बेचा गया, यह एक इंटरनेशनल सीक्रेट होता है। इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता क्योंकि इससे बिजनेस के कॉम्पिटिटर्स को रणनीति पता चल जाती है और संबंधित सरकारों के लिए भी परेशानी खड़ी हो सकती है। सीक्रेसी लॉ के तहत यह बेहद कॉन्फिडेंशियल डेटा है। इसके अलावा बिजनेस से जुड़े सभी जरूरी और वैध आंकड़े ऑडिटेड बैलेंस शीट में पहले से मौजूद हैं। सवाल 18: इस मामले में कंपनी का अगला कदम क्या होगा? जवाब: कंपनी SEBI के अंतरिम ऑर्डर का कानूनी और तथ्यात्मक रूप से जवाब दे रही है। वालकाम्बी और उसकी होल्डिंग कंपनी जीजियर (Gezear) की सभी ऑडिटेड बैलेंस शीट और सर्टिफाइड डाक्यूमेंट्स दोबारा SEBI को सौंपे जा रहे हैं। कंपनी को भरोसा है कि इन दस्तावेजों को देखने के बाद SEBI का संदेह पूरी तरह दूर हो जाएगा और मामला जल्द ही साफ हो जाएगा। नॉलेज पार्ट: राजेश मेहता कौन हैं: 60 साल के राजेश जे. मेहता बेंगलुरु के रहने वाले हैं और वे राजेश एक्सपोर्ट्स के फाउंडर और चेयरमैन हैं। उन्होंने कॉलेज छोड़ने के बाद बहुत कम उम्र में कीमती धातुओं के बिजनेस में कदम रखा था। शुरुआती दिनों में वे चांदी का व्यापार करते थे। इसके बाद वे ज्वेलरी बिजनेस में आए। उन्होंने साल 1989 में राजेश एक्सपोर्ट्स की स्थापना की और इसे दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनिंग और एक्सपोर्ट कंपनियों में से एक बना दिया। ‘रेवेन्यू इन्फ्लेशन’ क्या है: जब कोई कंपनी अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत दिखाने, बैंक लोन हासिल करने या शेयर बाजार में अपने शेयर की कीमतें बढ़ाने के लिए असल बिक्री से ज्यादा कमाई कागजों पर दिखाती है, तो उसे ‘रेवेन्यू इन्फ्लेशन’ या रेवेन्यू बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना कहते हैं। इसमें अक्सर बिना किसी वास्तविक माल की डिलीवरी के केवल बिल बना दिए जाते हैं।
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