खुद की एयरलाइंस शुरू नहीं करेगा अडाणी ग्रुप:अभी एयरपोर्ट ऑपरेशन संभालता है ग्रुप, नियमों में ढील देने की बात चल रही थी

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अडाणी ग्रुप ने उन सभी खबरों और अटकलों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि ग्रुप खुद की एयरलाइन शुरू करने की योजना बना रहा है। कंपनी ने आधिकारिक बयान जारी कर इन मीडिया रिपोर्ट्स को पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद बताया है। सवाल जवाब में पूरा मामला समझें… सवाल 1. अडाणी ग्रुप को लेकर क्या मीडिया रिपोर्ट्स आई थीं? जवाब: हाल ही में मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि अडाणी ग्रुप भारत के एविएशन सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए खुद की एयरलाइन शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए सरकार से नियमों में बदलाव की मांग कर रहा है। सवाल 2. अडाणी ग्रुप ने इस पर क्या सफाई दी है? जवाब: अडाणी ग्रुप ने एक बयान जारी कर इन सभी रिपोर्ट्स का पूरी तरह खंडन किया है। ग्रुप ने कहा कि “हम हालिया मीडिया रिपोर्ट्स और बाजार में चल रही अटकलों का पूरी तरह से खंडन करते हैं। ये खबरें पूरी तरह से बेबुनियाद और गलत हैं। कंपनी एयरलाइन बिजनेस में उतरने के किसी भी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रही है।” सवाल 3. रिपोर्ट्स में किन नियमों को बदलने की बात कही जा रही थी? जवाब: रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) एयरलाइन और एयरपोर्ट बिजनेस के बीच क्रॉस-ओनरशिप के नियमों को आसान बनाने पर विचार कर रहा है। मौजूदा नियमों के मुताबिक एयरपोर्ट चलाने वाले ऑपरेटर किसी एयरलाइन में 10% से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं रख सकते। चर्चा थी कि अडाणी ग्रुप इस 10% की सीमा को हटवाना चाहता है। सवाल 4. क्या अडाणी ग्रुप ने पहले भी एयरलाइन बिजनेस से दूर रहने की बात कही थी? जवाब: हां, अडाणी ग्रुप के एविएशन बिजनेस का काम देख रहे जीत अडाणी ने पहले एक इंटरव्यू में साफ कहा था कि एयरलाइन बिजनेस चलाना उनके ग्रुप के बिजनेस मॉडल में फिट नहीं बैठता। उन्होंने कहा था कि ग्रुप का फोकस हाई-मार्जिन वाले इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स में निवेश करने पर है, जबकि एयरलाइन बिजनेस में चुनौतियां और जोखिम ज्यादा होते हैं। सवाल 5. तो फिर एविएशन सेक्टर में अडाणी ग्रुप का फोकस किस पर रहेगा? जवाब: अडाणी ग्रुप एविएशन सेक्टर के इंफ्रास्ट्रक्चर और सपोर्ट सिस्टम पर ही ध्यान देगा। वर्तमान में ग्रुप देश के 8 प्रमुख हवाई अड्डों का संचालन करता है। इसके अलावा ग्रुप का फोकस ग्राउंड हैंडलिंग, मेंटेनेंस-रिपेयर (MRO), पायलट ट्रेनिंग और ब्राजील की कंपनी ‘एम्ब्रेयर’ के साथ मिलकर भारत में पैसेंजर जेट्स बनाने के प्रोजेक्ट पर बना रहेगा। अडाणी ग्रुप का एविएशन इकोसिस्टम सवाल 6. सरकार को इस नीति में बदलाव करने की जरूरत क्यों पड़ रही है? जवाब: वर्तमान में भारतीय घरेलू एविएशन मार्केट में इंडिगो और एअर इंडिया का दबदबा है। दोनों कंपनियां मिलकर करीब 90% मार्केट शेयर कंट्रोल करती हैं। सरकार इस मार्केट में कॉम्पिटिशन बढ़ाना चाहती है, ताकि यात्रियों को बेहतर सेवाएं और विकल्प मिल सकें। इसीलिए एयरपोर्ट ऑपरेटरों को भी एयरलाइन चलाने की अनुमति देने पर विचार किया जा रहा है। सवाल 7. यदि नियम बदलते हैं तो क्या एयरलाइंस भी एयरपोर्ट्स में हिस्सेदारी ले सकेंगी? जवाब: हां, अगर नागरिक उड्डयन मंत्रालय क्रॉस-ओनरशिप नियमों में ढील देता है, तो इससे दोतरफा रास्ता खुलेगा। जहां एक तरफ एयरपोर्ट चलाने वाली कंपनियां एयरलाइंस शुरू कर सकेंगी, वहीं दूसरी तरफ एयरलाइंस कंपनियां भी एयरपोर्ट्स में हिस्सेदारी खरीद सकेंगी। नॉलेज बॉक्स: क्या है ‘क्रॉस-ओनरशिप’ नियम? यह नियम एयरपोर्ट ऑपरेटर को किसी एयरलाइन में 10% से ज्यादा शेयर रखने से रोकता है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि एयरपोर्ट मालिक किसी खास एयरलाइन को फायदा न पहुंचाए और सभी एयरलाइंस को बराबर मौके मिलें।

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