अमेरिका के स्कूलों में बड़ी टेक कंपनियों का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एपल और ओपनएआई जैसी कंपनियां शिक्षकों और छात्रों के लिए प्रशिक्षण, वर्कशॉप और तकनीकी उपकरण उपलब्ध करा रही हैं। हालांकि, इनके बढ़ते दखल का अब विरोध भी शुरू हो गया है। अमेरिकन फेडरेशन ऑफ टीचर्स (एएफटी) ने माइक्रोसॉफ्ट और ओपनएआई के साथ मिलकर 220 करोड़ रुपए से ज्यादा का एआई प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। आलोचकों का कहना है कि इससे शिक्षा व्यवस्था पर कॉर्पोरेट हितों का प्रभाव बढ़ेगा और शिक्षक की भूमिका कमजोर हो सकती है। टेक कंपनियां स्कूलों को लैपटॉप, टैबलेट, ऑपरेटिंग सिस्टम और एप उपलब्ध कराने के साथ अपने अनुकूल विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की पैरवी भी करती हैं। माइक्रोसॉफ्ट अपने माइनक्राफ्ट गेम के साथ कंप्यूटर साइंस की शिक्षा भी उपलब्ध कराता है। लॉस एंजेलिस यूनिफाइड स्कूल डिस्ट्रिक्ट जैसे बड़े स्कूल सिस्टम ने विरोध के बीच छोटे बच्चों के लिए आईपैड और क्रोम बुक का इस्तेमाल बंद करने का फैसला किया है। करीब एक दशक पहले टेक कंपनियां सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की कमी दूर करने के लिए स्कूलों में कोडिंग सिखाने को बढ़ावा देती थीं। अब एआई के खुद कोड लिखने और टेक कंपनियों में छंटनी के बीच उनका जोर एआई शिक्षा पर है। कुछ शिक्षकों और प्रोफेसरों ने चेतावनी दी है कि एआई चैटबॉट छात्रों को फीडबैक देने जैसे शिक्षकों के जरूरी काम को स्वचालित कर सकते हैं। माइक्रोसॉफ्ट के वाइस चेयरमैन और अध्यक्ष ब्रैड स्मिथ ने बताया कि यह सिलसिला इसलिए शुरू हुआ क्योंकि सरकारी स्कूल अकसर महत्वपूर्ण आधुनिक विषयों को पढ़ाने और बाजार की लगातार बदलती मांगों के लिए छात्रों को तैयार करने में असमर्थ प्रतीत होते थे। उन्होंने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट जैसे कॉर्पोरेट के समर्थन के बिना स्कूल आज कहां होते। गूगल का दबदबा गूगल ने स्कूलों में सस्ते क्रोमबुक और मुफ्त एप्स के माध्यम से दबदबा बनाया है। उसकी हिस्सेदारी 59% तक पहुंच चुकी है। गूगल का लक्ष्य बच्चों को कम उम्र से ही जीमेल और क्रोम जैसी सेवाओं का आदी बनाना है, ताकि बाद में डेटा और विज्ञापनों से मुनाफा कमाया जा सके। कुछ माता-पिता और स्कूल अब स्क्रीन के बहुत ज्यादा उपयोग से निराश हो चुके हैं। फार्मा कंपनियों का तरीका अपना रहीं वर्षों पहले फार्मा कंपनियां डॉक्टरों को नए ब्रांड-नाम वाली दवाएं लिखने को प्रेरित करने के लिए उनके सेमिनार आयोजित करती थीं। जॉर्ज टाउन यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डॉ. एड्रिएनफुघ-बर्मन कहती हैं, इंडस्ट्री उस चीज में पैसा लगाती है, जहां मदद मिलती है। सर्वेक्षण और रिसर्च के लिए भी धन देती हैं टेक कंपनियां एआई चैटबॉट्स जैसेउत्पादों और कंप्यूटर साइंस जैसे कोर्सको जरूरी प्राथमिकताएं बनाने में मददकरने के लिए सर्वेक्षण और रिसर्चरिपोर्ट बनाने के लिए धन देती हैं।
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