ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स से खेती की दवाइयां खरीदने वालों के लिए काम की खबर है। कंज्यूमर अथॉरिटी CCPA ने अमेजन, फ्लिपकार्ट और जियोमार्ट पर बिना रजिस्ट्रेशन वाली कीटनाशक दवा साइक्लोसिनोन हर्बीसाइड बेचने पर कार्रवाई की है। अमेजन और फ्लिपकार्ट पर ₹10-10 लाख और जियोमार्ट पर ₹5 लाख का फाइन लगाया गया है। CCPA ने इस दवा की बिक्री और इसके विज्ञापनों पर तुरंत रोक लगाने के आदेश दिए हैं, ताकि किसानों और आम ग्राहकों की सुरक्षा से खिलवाड़ न हो। 43 हजार से ज्यादा पैकेट खरीद चुके थे लोग CCPA के मुताबिक, इस अमान्य और बिना जांच वाली दवा का सबसे बड़ा बाजार अमेजन पर बन गया था। अमेजन के जरिए इस कीटनाशक के कुल 38,410 ऑर्डर आए, जिनमें 43,634 पैकेट बेचे गए। इन दवाओं की कुल कीमत 96.43 लाख रुपए थी। सरकार का कहना है कि ये आंकड़े बताते हैं कि कितने बड़े पैमाने पर किसानों और आम ग्राहकों को धोखे में रखा गया और उनकी सेहत और फसलों को खतरे में डाला गया। कृषि मंत्रालय की शिकायत के बाद जांच हुई यह पूरा मामला तब सामने आया जब किसानों की संस्था क्रॉप केयर फेडरेशन ऑफ इंडिया ने इसकी शिकायत की और कृषि मंत्रालय ने जांच शुरू करवाई। जांच में पता चला कि साइक्लोसिनोन नाम का यह केमिकल सरकार के कीटनाशक एक्ट 1968 की लिस्ट में शामिल ही नहीं है। इसका सीधा मतलब यह है कि यह दवा फसलों, मिट्टी या इंसानों के लिए कितनी सुरक्षित और असरदार है। इसकी सरकार से कोई भी कानूनी जांच या क्वालिटी चेक कराई ही नहीं गई थी। कंपनियों ने बिना किसी सरकारी मंजूरी के इसे सीधा बेचना शुरू कर दिया था। केमिकल का नाम छिपाकर प्रोडक्ट बेचा जा रहा था खेती में इस्तेमाल होने वाली इस दवा को कौन से केमिकल्स को मिलाकर बनाया गया है, इसकी जानकारी दिए बिना ऑनलाइन साइट्स पर बेचा जा रहा है। इसे देखते हुए सरकार ने तीनों कंपनियों से कहा है कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर बिक रहे ऐसे सभी सामानों की खुद जांच करें, ताकि कानून तोड़ने वाली या सेहत को नुकसान पहुंचाने वाली चीजें ऑनलाइन न बिक सकें। इसके साथ ही कंपनियों को 15 दिन के अंदर इस पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है। कंपनियां सेलर के भरोसे रहकर पल्ला नहीं झाड़ सकतीं कार्रवाई के दौरान अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों ने अपना बचाव करते हुए कहा कि सामान सही है या गलत, इसकी पूरी जिम्मेदारी सामान बेचने वाले यानी सेलर की होती है और उनके बीच ऐसा एग्रीमेंट होता है। इस पर CCPA ने कहा कि कंपनियों और सेलर के बीच का कोई भी निजी समझौता देश के कानून और ग्राहकों की सुरक्षा से बड़ा नहीं हो सकता। सामान बेचने वाले गलत या अधूरी जानकारी भी दे सकते हैं। सिर्फ सेलर के भरोसे बैठकर अमान्य प्रोडक्ट बिकने देना कंपनियों की घोर लापरवाही और उनके चेकिंग सिस्टम की नाकामी है।
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