टेक कंपनी ओरेकल में फिर से छंटनी शुरू हो गई है। कंपनी ने अमेरिका में हजारों कर्मचारियों को निकाल दिया है। इस फैसले के बाद भारत में स्थित ओरेकल डेवलपमेंट सेंटर के कर्मचारियों के बीच भी अनिश्चितता का माहौल है। कंपनी AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश बढ़ा रही है, जिसके लिए पारंपरिक विभागों से बजट कम किया जा रहा है। हालांकि, भारत में कितने कर्मचारियों की नौकरी जाएगी, इस पर ओरेकल ने अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। ईमेल से पहले VPN और स्लैक एक्सेस बंद हो रहा बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारियों को ले-ऑफ की आधिकारिक जानकारी मिलने से पहले ही सिस्टम का एक्सेस बंद कर दिया जाता है। छंटनी की प्रक्रिया के तहत कर्मचारियों का VPN एक्सेस बंद हो जाता है और उनके स्लैक अकाउंट डिसकनेक्ट कर दिए जाते हैं। इसके बाद सुबह करीब 6 बजे तक कर्मचारियों को ईमेल के जरिए नौकरी से निकाले जाने की सूचना मिलती है। कर्मचारी बोले- छंटनी का तरीका काफी सख्त… 21,000 कर्मचारियों को पहले ही निकाला जा चुका है ओरेकल ने इस साल अपने कुल वर्कफोर्स में करीब 13% यानी 21,000 कर्मचारियों को निकाला है। 31 मई 2026 तक कंपनी में कुल 1.41 लाख कर्मचारी काम कर रहे थे। 14 सितंबर को अमेरिका में हुई छंटनी से साफ है कि कंपनी की रीस्ट्रक्चरिंग जारी है। इन विभागों पर पड़ रहा है सबसे ज्यादा असर इस बार कर्मचारियों को उनकी खराब परफॉर्मेंस की वजह से नहीं निकाला जा रहा है, बल्कि कंपनी अपनी प्राथमिकताओं को बदल रही है। इसी वजह से सालों से काम कर रहे और बेहतरीन काम करने वाले कर्मचारियों को भी हटाया जा रहा है। इन विभागों पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है: अगर यह छंटनी भारत में भी शुरू होती है, तो इसका असर केवल कस्टमर केयर या सपोर्ट स्टाफ पर ही नहीं, बल्कि टेक्निकल और इंजीनियरिंग टीमों पर भी पड़ेगा। भारत में इस साल पहले भी हुई थी छंटनी इससे पहले इसी साल मार्च-अप्रैल में ओरेकल इंडिया से बड़े पैमाने पर लोगों को निकाला गया था। खबरों के मुताबिक, तब करीब 12,000 कर्मचारियों की नौकरी गई थी। हालांकि कंपनी ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी। पुराने काम बंद, AI और डेटा सेंटर में नई नौकरियां ओरेकल एक तरफ पुराने विभागों से लोगों को हटा रही है, तो दूसरी तरफ AI और डेटा सेंटर जैसे नए क्षेत्रों में भर्तियां भी कर रही है। कंपनी अब इंफ्रास्ट्रक्चर, नेटवर्क की मजबूती, डेटा सेंटर बनाने और AI जैसी नई तकनीकों पर सबसे ज्यादा ध्यान दे रही है। भारत पर इसका क्या असर हो सकता है? अमेरिका में 14 सितंबर को हुई छंटनी के बाद भारत में काम कर रहे कर्मचारियों की चिंता भी बढ़ गई है। जिस तेजी से कंपनी पुराने सॉफ्टवेयर का काम समेटकर AI की तरफ बढ़ रही है, उससे भारत में भी कर्मचारियों के रोल बदले जा सकते हैं।
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