पेट्रोल ₹18 और डीजल ₹35 महंगा हो सकता है:बंगाल सहित 5 राज्यों में चुनाव के बाद बढ़ सकते हैं दाम, तेल कंपनियां नुकसान में

Spread the love

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से पेट्रोल ₹18 और डीजल ₹35 प्रति लीटर तक महंगा हो सकता है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म मैक्वायरी की रिपोर्ट में कहा गया है कि क्रूड ऑयल महंगा होने के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर हैं। इससे कंपनियों को नुकसान हो रहा है। ऐसे में पश्चिम बंगाल सहित 5 राज्यों में चुनाव खत्म होने के बाद कंपनियां दाम बढ़ा सकती हैं। हर दिन ₹1,600 करोड़ का नुकसान झेल रहीं कंपनियां कच्चा तेल महंगा होने से कंपनियों को प्रति लीटर पेट्रोल पर 18 रुपए और डीजल पर 35 रुपए का घाटा हो रहा है। पिछले महीने के पीक पर ये तीनों कंपनियां हर दिन करीब 2,400 करोड़ रुपए का नुकसान झेल रही थीं। एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए की कटौती के बाद यह घाटा घटकर 1,600 करोड़ रुपए रह गया है। हर 10 डॉलर के उछाल से नुकसान करीब 6 रुपए प्रति लीटर बढ़ जाता है। भारत 88% कच्चा तेल आयात करता है भारत अपनी जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल आयात करता है। इसमें से 45% मिडिल ईस्ट और 35% रूस से आता है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें न केवल तेल कंपनियों, बल्कि देश के चालू खाता घाटे (CAD) के लिए भी खतरा हैं। अनुमान है कि 2026 की पहली तिमाही में यह घाटा बढ़कर 20 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। 9 साल में एक्साइज ड्यूटी 22% से 8% हुई सरकारी राजस्व में तेल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी का योगदान लगातार कम हो रहा है। वित्त वर्ष 2017 में यह 22% था, जो अब घटकर सिर्फ 8% रह गया है। अगर सरकार पूरी एक्साइज ड्यूटी हटा भी दे, तो भी मौजूदा कीमतों पर तेल कंपनियों का घाटा पूरी तरह खत्म नहीं होगा। अमेरिका सहित कई देशों ने बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमतें अगस्त 2022 के बाद पहली बार 4 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर पहुंच गई हैं। वहीं पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका सहित कई पड़ोसी देशों ने भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा किया है। भारत में कैसे तय होती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें? जून 2010 तक सरकार पेट्रोल की कीमत निर्धारित करती थी और हर 15 दिन में इसे बदला जाता था। 26 जून 2010 के बाद सरकार ने पेट्रोल की कीमतों का निर्धारण ऑयल कंपनियों के ऊपर छोड़ दिया। इसी तरह अक्टूबर 2014 तक डीजल की कीमत भी सरकार निर्धारित करती थी। 19 अक्टूबर 2014 से सरकार ने ये काम भी ऑयल कंपनियों को सौंप दिया। अभी ऑयल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमत, एक्सचेंज रेट, टैक्स, पेट्रोल-डीजल के ट्रांसपोर्टेशन का खर्च और बाकी कई चीजों को ध्यान में रखते हुए रोजाना पेट्रोल-डीजल की कीमत तय करती हैं। —————————————————— बिजनेस से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… ईरान जंग का असर- खाने का तेल 7% महंगा:साबुन-बिस्किट के पैकेट छोटे हुए, वॉशिंग मशीन, फ्रिज और LED के दाम 15% तक बढ़े ईरान समेत पूरे पश्चिम एशिया में तनाव से जो हालात पैदा हुए हैं, उसके चलते आम भारतीयों का घरेलू खर्च बढ़ रहा है। रसोई से लेकर कपड़े और घरेलू उपकरणों तक, हर चीज या तो महंगी हो गई है या उनके दाम बढ़ने की आशंका गहरा रही है। पूरी खबर पढ़ें

Source: Click here