भारतीय किचन में फ्रोजन फूड अब सिर्फ इमरजेंसी या पार्टी की जरूरत नहीं रहा। बर्गर पैटी, नगेट्स, मोमो और कबाब जैसे प्रोडक्ट्स तेजी से रोजमर्रा के खाने का हिस्सा बन रहे हैं। मार्केट रिसर्च फ्यूचर के मुताबिक अगले 10 साल में देश का फ्रोजन फूड बाजार हर साल 14% से भी ज्यादा बढ़ने का अनुमान है। बदलती लाइफस्टाइल, वर्किंग वुमन की बढ़ती तादाद और क्विक कॉमर्स का विस्तार- ये तीन ताकतें मिलकर इस बाजार को अगले दौर में ले जा रही हैं। आईटीसी मास्टरशेफ, मैकेन और एलटी फूड्स जैसी कंपनियां नए प्रोडक्ट्स, कोल्ड चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल चैनलों में भारी निवेश कर रही हैं। घर का खाना पसंद, तैयारी का झंझट नहीं चाहते लोग फ्रोजन फूड कैटेगरी अभी सालाना करीब 13% की दर से बढ़ रही है। इसमें तैयार फ्रोजन स्नैक्स की रफ्तार पारंपरिक फ्रोजन सब्जियों, मसलन, मटर और मक्का से काफी तेज है। अलवारेज एंड मार्सल इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर ऋषभ जैन के मुताबिक, ग्राहक ऐसा खाना चाहते हैं जो घर पर ताजा पका हो, लेकिन तैयारी का झंझट न हो। नगेट्स, फ्राइज और मोमो जैसे प्रोडक्ट्स इसीलिए सबसे तेजी से बिक रहे हैं। इनमें पकाने का आखिरी काम ग्राहक खुद करता है। फ्रोजन फूड की बढ़ती लोकप्रियता के जानिए चार बड़े कारण 1. बदली लाइफस्टाइल – बढ़ती आय, व्यस्त दिनचर्या, बढ़ती कामकाजी महिलाओं ने रोज के खाने की प्लानिंग बदल दी है। 2. एयर फ्रायर कल्चर – घर पर रेस्तरां जैसा अनुभव देने वाले एयर फ्रायर ने फ्रोजन स्नैक्स की खपत के नए दरवाजे खोले हैं। 3. क्विक कॉमर्स की पहुंच – स्विगी, इंस्टामार्ट, ब्लिंकिट जैसे प्लेटफॉर्म युवा खरीदारों तक फ्रोजन प्रोडक्ट्स मिनटों में पहुंचा रहे। 4. सिर्फ स्नैकिंग से आगे – आईटीसी मास्टरशेफ कहती है- फ्रोजन फूड अब सिर्फ स्नैकिंग नहीं, लंच-डीनर हिस्सा बन रहा। कंपनियों की बड़ी तैयारी – आफ्टर-स्कूल स्नैकिंग से बिरयानी किट तक आईटीसी मास्टरशेफ – अनियन रिंग्स, पेरी-पेरी प्रॉन्स, फलाफेल कबाब, साबूदाना टिक्की; आईक्यूएफ (इंडिविजुअली क्विक फ्रीजिंग) टेक्नोलॉजी। मैकेन फूड्स इंडिया – एयर फ्रायर के लिए खास प्रोडक्ट्स; आफ्टर-स्कूल स्नैकिंग और मिनी मील सेगमेंट। एलटी फूड्स (दावत) – बिरयानी किट, थाई ग्रीन करी राइस किट, कप्पा राइस; डिजिटल चैनल से सालाना 45% से ज्यादा ग्रोथ। फैक्ट्री से लेकर रिटेल शेल्फ तक खर्चीला कोल्ड चेन फ्रोजन फूड बाजार आकर्षक जरूर है, लेकिन मुनाफा कमाना आसान नहीं है। फैक्ट्री से लेकर रिटेल शेल्फ तक बिना रुके कोल्ड चेन बनाए रखना बहुत खर्चीला है। ऋषभ जैन के मुताबिक, इस सेगमेंट में सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां डिस्ट्रीब्यूशन की लागत और किफायती दाम के बीच किस हद तक संतुलन बना पाती हैं। निरंतर नए-नए प्रोडक्ट भी लाते रहना जरूरी है क्योंकि लोग एक ही तरह के खाने से जल्द ऊब जाते हैं।
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